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प्रहलाद लोधी मामले में राजभवन नहीं लेगा एक्शन

- भाजपा विधायक की सदस्यता बहाल करने का नहीं मिला कोई आधार- विधि विशेषज्ञों की राय के बाद भाजपा का ज्ञापन ठंडे बस्ते में
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bjp file

भोपाल। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति द्वारा पवई से भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त किए जाने के मामले में राजभवन कोई एक्शन नहीं लेगा। भाजपा के ज्ञापन के बाद राज्यपाल ने इस मामले में राजभवन के विधि विशेषज्ञों से इसका परीक्षण करवाया। इसमें पता चला कि अब तक इस तरह किसी प्रकरण में राजभवन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। न ही कानून में इस तरह का कोई प्रावधान है। सूत्रों का कहना है कि राजभवन ने भाजपा के ज्ञापन को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

भाजपा विधायकों ने मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात कर कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष को विधायक की सदस्यता समाप्त करने का अधिकार नहीं है, इसके बाद भी उन्होंने भाजपा विधायक की सदस्यता समाप्त कर दी। जबकि यह अधिकार राज्यपाल के पास हैं। विधानसभा अध्यक्ष का आदेश नियम विरुद्ध है। राज्यपाल ने भाजपा विधायकों के तर्क तो सुने लेकिन उन्हें राजभवन से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। आश्वासन देने के पहले राजभवन पूरे मामले की कानूनी बारीकियां समझना चाहता था। इसलिए राजभवन ने अपने कानूनी जानकारों और विशेषज्ञों से भी इस मामले में जानकारी ली।

सदस्यता बहाली का कोई आधार नहीं -

भाजपा विधायकों के ज्ञापन और आग्रह पर राजभवन सक्रिय हुआ। भाजपा विधायकों द्वारा दिए गए तर्कों के आधार जानने का प्रयास किया गया, लेकिन ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला। सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल ने यह जानना चाहा कि लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(3) के तहत यदि किसी सांसद या विधायक की सदस्यता समाप्त किए जाने के बाद क्या उसकी बहाल हुई है। क्योंकि रुलिंग भी यही है कि जिस तारीख से कोर्ट उसे दोषी पाया जाता है उसी तारीख से उसकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी। लेकिन ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिला। इस पर तय किया गया कि राजभवन अध्यक्ष के निर्णय पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।

यह है मामला -
विशेष अदालत ने पवई से भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी को आपराधिक मामले में दोषी पाए जाने पर दो साल की सजा सुनाई थी। उसे आधार मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता समाप्त करते हुए पवई विधानसभा सीट रिक्त घोषित कर दी। इसकी सूचना चुनाव आयोग को भी भेज दी। भाजपा अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती दे रही है। विशेष अदालत के निर्णय के खिलाफ लोधी हाईकोर्ट गए हैं।