
pratima bagri caste certificate controversy, प्रतिमा बागरी को 6 जुलाई को राज्य स्तरीय छानबीन समिति के सामने प्रस्तुत होने के निर्देश (source- pratima bagri facebook page)
Pratima Bagri caste certificate controversy: मध्यप्रदेश में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी की मुश्किलें बढ़ गई हैं, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने प्रतिमा बागरी को नोटिस जारी किया है। राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने प्रतिमा बागरी को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और जाति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता अब उच्च स्तरीय जांच के घेरे में है। जबलपुर हाईकोर्ट की युगलपीठ ने इस मामले में हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को समय सीमा के भीतर आदेश पारित करने का निर्देश दिया था।
जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त कार्यालय ने मंगलवार को जो नोटिस जारी किया है, उसमें राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र विवाद को लेकर 6 जुलाई को प्रतिमा बागरी को समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही समिति ने ये भी निर्देश दिए हैं कि वह वर्ष 1950 की स्थिति के अनुसार खुद के सतना के निवासी होने के साथ ही बागरी अनुसूचित जाति का सदस्य होने संबंधी प्रमाण-पत्र (जाति प्रमाण-पत्र) समिति के सामने प्रस्तुत करें।
बता दें कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने की मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में आरोप लगाया है कि राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने अनुसूचित जाति के गलत प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर सतना जिले की रैगवां सीट से चुनाव जीता है। ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की जांच के निर्देश प्रदेश स्तरीय हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी (राज्य स्तरीय छानबीन समिति) को दिये थे। युगलपीठ ने कमेटी को आदेशित किया था कि जाति प्रमाण-पत्र की जांच 30 जून से पहले कर आदेश जारी करें। तब कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि कमेटी निर्धारित समय अवधि में आदेश का पालन नहीं करती है तो याचिकाकर्ता पुनः याचिका दायर करने स्वतंत्र है।
कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार का आरोप है कि कि प्रतिमा बागरी ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण-पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया और उसी आधार पर सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर मंत्री पद हासिल किया है। प्रदीप अहिरवार ने हाईकोर्ट में दायर की अपनी याचिका में दावा किया है बागरी जाति संबंधित क्षेत्र में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है और मंत्री प्रतिमा बागरी वास्तव में राजपूत/ठाकुर समुदाय से संबंध रखती हैं। याचिका में 1961 और 1971 की जातिगत जनगणना, 2003 की राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के फैसले और 2007 के केंद्र सरकार के राजपत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि ‘बागरी’ को SC श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
Published on:
30 Jun 2026 04:27 pm
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