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इन राजा ने भोपाल को बनाया था सबसे पहले स्मार्ट, अनोखी थी इनकी प्लानिंग

भोज के प्लान में किले की चार दीवारों में हरेक की लंबाई करीब 660 मीटर थी। भीतर अधिकारी, कर्मचारी, कारोबारी, कारीगर और पुरोहितों के बसने की जगहें तय थीं।

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Anwar Khan

May 03, 2016

raja bhoj

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भोपाल। एक दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में मध्यप्रदेश के पहले आर्च ब्रिज की नींव रखी। उन्होंने इस दौरान घोषणा की कि भोपाल के बड़े तालाब के पुरातात्विक महत्व की खोज के लिए रिसर्च कराया जाएगा। यहां जो वैदिक सिटी बसी हुई थी, उसकी खोज भी की जाएगी। साथ ही 11वीं शताब्दी में राजा भोज की वैज्ञानिक योजना को समझने के लिए इंटरनेशनल रिसर्च स्कॉलर बुलाए जाएंगे। सीएम ने राजा भोज की सिटी प्लानिंग का भी जिक्र किया। आपको बता दें कि राजा भोज ने भोपाल को स्मार्ट टाउनशिप बनाने की नींव 11वीं शताब्दी में रख दी थी। उस समय के भोपाल की डिजाइन उन्होंने ऐसी बनाई थी, जिससे आने वाली पीढ़ी को कभी परेशानी न हो। राजा भोज की सिटी प्लानिंग पर कई रिसर्च भी हुए। आइए हम बताते हैं कैसी थी राजा भोज की स्मार्ट टाउनशिप....

भोज ने ही बनाई थी डिजाइन
इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी ने भोपाल पर किए अपने रिसर्च में पाया कि यह इकलौता ऐसा शहर है, जिसकी बसाहट वैज्ञानिक ढंग से की गई है। एक हजार साल पहले यह शहर जुमेराती गेट, पीर गेट, इब्राहिमपुरा और इतवारा के बीच था। बड़े तालाब के पास यह शहर कैसा हो, सड़कें और चौराहे कहां और कितने हों, चारों तरफ से कैसे सुरक्षित हो, दरवाजे कितने और कहां हों, इसकी विस्तृत डिजाइन खुद राजा भोज (1010 से 1055) ने ही बनाई थी।

कुछ ऐसी थी चाहरदीवारी
'सिटी प्लानिंग ऑफ राजा भोज इन समरांगण सूत्रधार' शीर्षक से प्रकाशित इस रिसर्च स्टडी के मुताबिक तबका छोटा सा भोपाल 12 दरवाजों के साथ एक चारदीवारी से घिरा था। दुर्ग की दीवारों से सटकर शहर को चारों ओर से घेरने वाला रिंगरोड। तब शहर के बीचों-बीच था आज का चौक बाजार। सबसेे बड़ा चौराहा।

राजा भोज की नगरी से जुड़े रोचक फैक्ट
- भोज के समय भोपाल के चारों तरफ किले के बाहर खाई में बड़े तालाब का पानी ओवरफ्लो किया गया था। तब छोटा तालाब नहीं था।
- बड़ा तालाब भोज के पांच सौ साल बाद तक अपने मूल आकार करीब 500 वर्ग किमी में फैला रहा।
1720 के बाद के दौर में नवाबी सल्तनत ने भोज की महान् रचना में अपनी इबारतें भी जोड़ीं।
- भोज के प्लान में किले की चार दीवारों में हरेक की लंबाई करीब 660 मीटर थी। भीतर अधिकारी, कर्मचारी, कारोबारी, कारीगर और पुरोहितों के बसने की जगहें तय थीं।
- किसी इमरजेंसी में शहर खाली करना पड़े तो हर ब्लॉक से बाहर जाने के लिए दो दिशाओं में दरवाजे थे।
- हयाते-कुदसी में है प्राचीन शिलालेख का जिक्र, 1184 में बनकर तैयार हुआ था सभा मंडल