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अगर दहेज देना हो तो माता-पिता पुत्री को रामचरितमानस जैसा उपहार दें

रामकथा: छठवें दिन रामविवाह, वन गमन प्रसंग का वर्णन

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Ram katha

Ram katha

भोपाल. जंबूरी मैदान में चल रही राम कथा के छठवें दिन कथावाचक मुरलीधर महाराज ने भगवान राम के विवाह और तुरंत बाद वनगमन का आदेश मिलने की कथा सुनाते हुए कहा कि वह पुत्र भाग्यशाली होते हैं, जिन्हें अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करने वन में जाना पड़ता है। मुरलीधर महाराज ने राम विवाह की कथा सुनाते हुए कहा कि जनक महाराज ने राम जी के साथ सीता को विदा किया। पूरे जनकपुर के नर-नारी एकत्र होकर बड़े दुखी मन से सीता जी को विदाई दे रहे है। सीता जी की विदाई का प्रसंग पूरी मार्मिकता से सुनाते हुए उन्होंने कहा कि विदाई से जनकपुर में बहुत ही गमगीन माहौल हो गया है। राजा जनक महाराज दशरथ को हाथी ,घोड़ा, रत्न, जवाहरात आदि वस्तुएं प्रदान कर रहे है, जिस पर राजा दशरथ ने जनक से कहा आप ने सीता जैसी कन्या प्रदान की है। कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं।

श्रोताओं को सीख देते हुए महाराज ने कहा कि हर पिता अपनी पुत्री को दहेज देता है, अगर दहेज में देना हो तो एक रामचरितमानस का गुटका जरूर देना चाहिए और कहना चाहिए कि रामचरितमानस को तीन बार जरूर पढ़ें। साथ ही दहेज प्रथा को बंद करना चाहिए। विदाई के बाद अयोध्या पहुंचने पर श्रीराम, लक्ष्मण, सीता का स्वागत नगरवासी करते है फिर महाराजा दशरथ के गुरु वशिष्ठ को अपने मन की बात कहते हैं कि मुझे राम को युवराज पद देना है। लेकिन भगवान राम को जैसे ही इस बात का पता चलता है वह माता-पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए लक्ष्मण जानकी सहित वन को निकल पड़ते हैं।

ये रहे मौजूद
वनवास के प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज ने तपसी का वेष धर के राम वन चले..... भजन इतने भावपूर्ण तरीके से गाया कि श्रोताओं की आंखें सजल हो गई। कथाश्रवण करने वालों में, मुख्य जमानद्वय रमेश रघुवंशी एवं हीरालाल गुर्जर, मुकेश शर्मा ,ललित पांडेय, मिथलेश गौर, अनिल अग्रवाल, उदितनारायण शर्मा, गोकुल कुशवाहा, भगवती रघुवंशी, रीना गुर्जर शामिल थे।