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मंत्रालय के सामने रुका ऑटो, बाहर निकला IAS ऑफिसर

आईएएस अधिकारी रमेश थेटे ऑटो से मंत्रालय पहुंचे। उन्होंने ऑटो वाले को पैसे दिये और पैदल ही मंत्रालय के अंदर चले गए। 

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rishi upadhyay

Dec 14, 2016

ramesh thete

ramesh thete

भोपाल। कभी लाल बत्ती लगी गाड़ी से मंत्रालय के गेट के अंदर जाने वाले रमेश थेटे जब मंगलवार को मंत्रालय पहुंचे तो सब हैरान रहे गए। आईएएस अधिकारी रमेश थेटे ऑटो से मंत्रालय पहुंचे। उन्होंने ऑटो वाले को पैसे दिये और पैदल ही मंत्रालय के अंदर चले गए। जब उनसे पूछा गया कि आज आप ऑटो में क्यों आए हैं तो उन्होंने कहा कि ऑटो में जाना सुविधाजनक महसूस होता है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रहे थेटे का अपने ही विभाग के एसीएस राधेश्याम जुलानिया से लम्बे समय से विवाद चल रहा है। जुलानिया के खिलाफ मोर्चा खोले थेटे उनके खिलाफ रिपोर्ट लिखाने थाने तक जा पहुंचे। राज्य के मुख्य सचिव ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें विभाग के सचिव पद से हटाते हुए बिना विभाग का अफसर बना दिया।


पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव पद से हटाए जाने के बाद रमेश थेटे पहले ही सरकारी आवास और गाड़ी छोड़ चुके हैं। मंगलवार को लगभग घंटा भर उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग में बिताया और कुछ लोगों से भी मिले। रमेश थेटे पहले ग्रामीण विकास सचिव थे, लेकिन अब वे मंत्रालय में ओएसडी हैं। उनका ऑटो से आना इसी विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है।


ramesh thete


इसलिए सुर्खियों में आए थे रमेश थेटे
इसी साल रमेश थेटे ने ग्रामीण विकास सचिव के पद पर रहते हुए विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया के खिलाफ सीएम को पत्र लिखकर कहा है कि जुलानिया ने उनके अधिकार छीन लिए हैं। महज शौचालय बनवाने और साफ कराने का काम देकर मुझे स्वीपर बनाकर रख दिया है।


इससे पहले भी थेटे सरकार के अन्याय के खिलाफ पहले भी आवाज उठा चुके हैं। थेटे का कहना है कि दलित होने के कारण उनसे अछूत की तरह व्यवहार किया जा रहा है। जुलाई में सीएम को लिखे पत्र में उन्होंने कहा था कि जातिवादी अधिकारी जुलानिया ने अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार-निवारण अधिनियम 1989 का उल्लंघन किया है, इसलिए जुलानिया के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएं। कार्रवाई नहीं होती है तो अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन करूंगा।

थेटे ने जुलानिया से बातचीत की ऑडियो रिकार्डिंग सीएम को भेजी थी। इसमें जुलानिया उनकी बात सुनने से इंकार कर रहे थे। इसके बाद जब जुलानिया के खिलाफ रमेश थेटे थाने में रिपोर्ट लिखाने पहुंचे तो राज्य के मुख्य सचिव ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए विभाग के सचिव पद से हटा दिया था।

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