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राशन दुकान संचालक बोले हमारा भी वेतनमान फिक्स करे सरकार

- भोपाल में प्रदेश भर के राशन दुकान संचालक विरोध प्रदर्शन करने सीएम हाउस पहुंच गए।

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भोपाल। प्रदेश भर के राशन दुकान संचालक मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सीएम हाउस के सामने विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गए। दरअसल इनकी ओर से अपना वेतनमान सरकार से तय करने की मांग की जा रही है।

राशन दुकान संचालकों का कहना है कि उनको आए दिन प्रशासन के नए-नए आदेशों का पालन करना पड़ता है। वहीं उनके कर्मचारियों का पारिश्रमिक काफी कम है और, ऐसे में उन्हें अब केवल कमीशन से घर चलाना काफी मुश्किल हो रहा है।

अपनी इन्हीं मांगों को लेकर सरकारी उचित मूल्य दुकान संचालक एसोसिएशन के सदस्य सीएम हाउस के सामने देर तक प्रदर्शन करते रहे। इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने यहां जमकर नारेबाजी भी की।

यहां मौजूद राशन दुकान संचालक ने सरकार को चेतावनी देते हुए ये भी कहा कि यदि सरकार उनकी मांग पूरी नहीं करती है तो वह 8 अप्रैल से काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और 23 अप्रैल को एक बार फिर रणनीति बनाकर सीएम हाउस का घेराव करेंगे।

ज्ञात हो कि प्रदेश में कुल 24 हजार कंट्रोल की दुकानें है, जिसमें करीब 55 हजार कर्मचारी राशन, खाद,बीज बेचते हैं, वहीं इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के सीएम हाउस की मुख्य रोड तक पहुंचने से सवाल भी खड़े होने शुरु हो गए हैं कि आखिर प्रदर्शनकारियों के सीएम हाउस पहुंचने या फिर घेराव की जानकारी इंटेलिजेंस को कैसे नहीं लगी?

ज्ञात हो कि कुछ समय पहले भी विदिशा में शासकीय राशन विक्रेता पीडीएस संघ के बैनर तले विक्रेताओं ने अपनी मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना.प्रदर्शन किया गया था। यह धरना प्रदर्शन पीडीएस विक्रेता संघ के बैनर तले जिले की सभी उचित मूल्य दुकान संचालकों ने एकत्रित होकर नीमताल पर किया था।

इस दौरान जिला अध्यक्ष और प्रदेश पदाधिकारियों के साथ अन्य पीडीएस संचालकों ने बताया था कि शासन से प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन में बढ़ोतरी की मांग की जा रही है। कारण ये है कि अन्य राज्यों में ज्यादा कमीशन है, लेकिन मध्यप्रदेश में दुकान संचालकों को कम कमीशन मिल पा रहा।

इसके अलावा पीडीएस विक्रेता संघ प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि उचित मूल्य विक्रेताओं की बड़ी विषम परिस्थिति है ऐसे में आए दिन किसी न किसी समस्या से जूझने को मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में जहां कभी मशीन की तो कभी सर्वर की समस्याए है, तो कभी मशीन की समस्याएं और भी अन्य समस्याएं है और तो और कम वेतन में काम करने की यहां मजबूरी है।