
भोपाल. मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी की गिरफ्तारी हो गई है। रतुल पुरी की गिरफ्तारी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के साथ फ्रॉड के मामले में हुई है। रतुल पुरी की गिनती कभी देश के सफल कारोबारियों में होती थी। लेकिन आज की तारीख में बैंक के साथ फ्रॉड से लेकर अगस्ता वेस्टलैंड डील में रिश्वतखोरी के आरोप में घिरे हुए हैं। आइए हम आपको रतुल पुरी की पूरी कहानी बताते हैं कि आखिर कैसे मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में इयर ऑफ द एंटरप्रेन्योर रहे की ये स्थिति हो गई।
ईडी ने रतुल पुरी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। दिल्ली हाईकोर्ट से रतुल पुरी की जमानत याचिका खारिज हो गई है। रतुल को अब जेल जाना होगा। रतुल पुरी सीएम कमलनाथ के भांजे हैं। सीएम कमलनाथ ने इस मामले से पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि रतुल को साजिश के तहत फंसाया गया है। उसके कारोबार से मेरा कोई संबंध नहीं है। न तो मैं उनकी कंपनी में शेयर होल्डर हूं और न ही डायरेक्टर।
क्या है मामला
दरअसल, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने रतुल पुरी के खिलाफ दो दिन पहले सीबीआई में 354 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में रतुल के अलावे कंपनी एमबीआईएल, पिता दीपक पुरी, मां नीता पुरी, संजय जैन और विनित शर्मा शामिल हैं। बैंक ने आरोप यह भी लगाया कि रतुल की कंपनी और उसके निदेशकों ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से फंड जारी करवाने को लेकर नकली दस्तावेजों का प्रयोग किया। यह फंड 2009 में लिया गया था। वहीं, रतुल ने कार्यकारी निदेशक के पद 2019 में इस्तीफा दे दिया था।
अगस्ता वेस्टलैंड में हैं आरोपी
वहीं, यूपीए सरकार के दौरान अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर का 3600 करोड़ रुपये में सौदा हुआ था। रिश्वतखोरी के आरोप में बाद में इस सौदे को रद्द कर दिया गया था। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी राजीव सक्सेना ने रतुल का नाम लिया था। रतुल पर मनी लॉन्ड्रिंग के भी मामले चल रहे हैं। वहीं, पिछले दिनों आयकर विभाग ने इसी मामले में उनकी करोड़ों की संपत्ति अटैच की थी।
टॉयलेट से भागे थे रतुल
26 जुलाई को रतुल पुरी ने अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूछताछ के दौरान टॉयलेट जाने के बहाने ईडी दफ्तर से भाग गए थे। उसी दिन उन्हें खोजने के लिए ईडी ने उनके घर और दफ्तर पर छापेमारी की थी। 27 जुलाई को इस मामले में सुनवाई हुई और कोर्ट ने इन्हें गिरफ्तारी से राहत दे दी। 21 अगस्त पर इस मामले में फिर सुनवाई होनी है।
मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में ईयर ऑफ द एंटरप्रेन्योर रहे हैं रतुल पुरी
19 जुलाई 1972 को जन्मे रतुल पुरी कभी एक सफल उद्यमी थे। उन्हें 2002 में इंडिया के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में ईयर ऑफ द एंटरप्रेन्योर का अवॉर्ड मिला था। रतुल ने कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग किया है। उन्हें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने कभी ग्लोबल लीडर भी माना था। वहीं, बिजनेस टुडे ने रतुल को इंडिया के 21 युवा उद्यमियों की सूची में शामिल किया था।
CEO ऑफ द ईयर भी रहे
रतुल को डॉटाक्वेस्ट मैगजीन ने भी आईटी इंडस्ट्री के यंग ब्रिगेड की सूची में रखा था। उसके बाद वर्ल्ड ब्रांड कांग्रेस ने 2014 में उन्हें ईयर ऑफ द सीईओ का अवॉर्ड दिया था। रतुल के नाम बिजनेस वर्ल्ड में कई उपलब्धियां हैं। लेकिन मोजर बेयर नाम की उनकी कंपनी के मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट पर अब ताले लटक गए हैं। उसके बाद से ही रतुल विवादों में हैं।
हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स के हैं निदेशक
रतुल पुरी अभी हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स के निदेशक हैं। यह कंपनी उर्जा के क्षेत्र में काम करती हैं। यह कंपनी कोल, थर्मल, सोलर और हाइड्रो उर्जा के क्षेत्र में काम कर रही हैं। इसमें विदेशी निवेश भी है। रतुल को 2015 में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत में काम करने के लिए एशियन पावर अवॉर्ड्स भी मिला था।
सितंबर 2018 में बंद हो गई कंपनी
हिंदुस्तान सभी हिट कंपनी रही मोजर बेयर सितंबर 2018 में बंद हो गई। 1999 में गौतमबुद्धनगर के फेस-2 और ग्रेटर नोएडा में 2002 में मोजर बेयर की यूनिट शुरू हुई थी। 2006 में कंपनी ने पूरी तरह उत्पादन शुरू हो गया था। कंपनी की तरफ से 15 हजार से अधिक लोगों को रोजगार दिया गया था। इसके अलावा हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिला था। उस दौरान कंपनी में 11 हजार स्थायी और चार हजार अस्थायी कर्मचारी थे। लेकिन सोलर सेक्टर में निवेश के बाद मोजर बेयर की स्थिति बिगड़ती गई है।
Updated on:
20 Aug 2019 07:19 pm
Published on:
20 Aug 2019 05:48 pm
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