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रवींद्र भवन : रबींद्र उत्सव के तहत ‘गीतांजलि’ का आयोजन

हाई बीट्स पर सुनाई बेहतरीन कंपोजीशंस

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भोपाल। हाई बीट्स पर झूमते यंगस्टर्स और बेहतरीन कंपोजीशंस। म्यूजिक का यह कॉम्बो पैक मिला रवींद्र भवन में चल रहे रबींद्र उत्सव में। यहां बुधवार को आयोजित गीतांजलि कार्यक्रम में शहर के जाने-माने बैंड ‘बंदिशें’ ग्रुप ने रॉक बैंड शो की परफॉर्मेंस दी। हैवी मैटल के लाउड एंड फास्ट म्यूजिक के बीच ‘बंदिशें’ बैंड के सुकून भरे कंपोजीशंस ने ऑडियंस का दिल जीत लिया। इस दौरान इस बैंड ने रवींद्र नाथ टैगौर और कुछ फोक एलेमेंट के साथ तैयार किए गए सॉन्ग की प्रस्तुति दी। यह परफॉर्मेंस डेढ़ घंटे की रही।

बेस रहा इंडिगनेशन

भोपाल के बंदिशें बैंड के इनोवेटिव म्यूजिक में ऑडियंश को कुल 12 गाने सुनने को मिले। जिसमें बैंड ने अपने खूबसूरत कंपोजीशंस का जलवा बिखेरा। प्रोग्राम की शुरुआत में बैंड ने इंडिगनेशन की प्रस्तुति दी जो इंस्ट्रूमेंटल बेस रही। इसके बाद ग्रुप ने रवींद्र नाथ टैगौर के गीत सुनाए। जिसमें बोडो आशा..., तूमी रोबे... और एकला चलो रे... शामिल रहे।

बेस रहा इंडिगनेशन

भोपाल के बंदिशें बैंड के इनोवेटिव म्यूजिक में ऑडियंश को कुल 12 गाने सुनने को मिले। जिसमें बैंड ने अपने खूबसूरत कंपोजीशंस का जलवा बिखेरा। प्रोग्राम की शुरुआत में बैंड ने इंडिगनेशन की प्रस्तुति दी जो इंस्ट्रूमेंटल बेस रही। इसके बाद ग्रुप ने रवींद्र नाथ टैगौर के गीत सुनाए। जिसमें बोडो आशा..., तूमी रोबे... और एकला चलो रे... शामिल रहे।

हिंदी में भी डिजाइन होंगे टेक्निकल कोर्सेस

भोपाल के एचआरडी मिनिस्ट्री और एआईसीटीई की ओर से जल्द ही नई एजुकेशन पॉलिसी लाने की तैयारी की जा रही है। ऐसा होने पर हिंदी में न सिर्फ टेक्निकल कोर्सेस के सिलबेस डिजाइन किए जाएंगे, बल्कि तकनीकी कोर्सेस भी डिजाइन होंगे। यह विशेष रूप से उन स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, जो इंग्लिश में वीक हैं और इस लैंग्वेज में किसी भी टेक्निकल कोर्स को करने से डरते हैं। नई एजुकेशन पॉलिसी के बाद वे भी आगे की पढ़ाई आसानी से कर सकते हैं। साल 1835 में जब एजुकेशन पॉलिसी लाई गई थी, तो लॉर्ड मैकाले ने कहा था कि भारत के लोग भले ही वेशभूषा और खून से भारतीय रहें, मगर उनकी सोच अंग्रेजों के समान उन्नत है। बेहद जरूरी है कि भारतीय अपनी मूलता को न भूलें।