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भोपाल। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा) की नजर में अब प्रदेश के 821 प्रोजेक्ट आ गए हैं। शुक्रवार शाम तक रेरा ने इन प्रोजेक्टों को पंजीबद्ध कर लिया था। ये सभी प्रोजेक्ट ऑनगोइंग श्रेणी के हैं, यानी कि जिनका निर्माण जल्द ही पूरा होगा।
प्रदेश के करीब 400 शहरों के आधार पर इस आंकड़े को देखें तो ये काफी कम है। इस स्थिति के हिसाब से मप्र के 60 फीसदी शहरों में कोई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ही नहीं चल रहा। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मिलाकर महज 821 प्रोजेक्ट ही हैं। उपनगरों में से तो80 फीसदी में कोई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट नहीं है। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी की वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, उज्जैन जैसे शहरों में ही रियल एस्टेट प्रोजेक्ट है।
इन प्रमुख शहरों की तहसीलों में से महज 20 फीसदी ही एेसी है, जहां कोई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट चल रहा है। पंजीयन के लिए रेरा ने प्लानिंग एरिया वाले प्रोजेक्ट को 90 दिन का समय दिया था, जो सितंबर की शुरुआत में ही खत्म हो गया। नॉन प्लानिंग के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए छह अक्टूबर का समय दिया था, जो शुक्रवार को समाप्त हो गया। रेरा अध्यक्ष एंटोनी डिसा के अनुसार पंजीयन की समय-सीमा तय की थी। अब समय-सीमा बढ़ाने की बात ही नहीं है। जो ऑनगोइंग प्रोजेक्ट पंजीबद्ध नहीं हुए वे अवैध माने जाएंगे और रेरा नियमों के तहत उन पर कार्रवाई होगी।
इस तरह के शहर में एक भी प्रोजेक्ट नहीं
रेरा के आंकड़े ८२१ प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन की स्थिति बता रहे हैं, लेकिन कई जिले एेसे हैं, जहां एक भी प्रोजेक्ट पंजीबद्ध नहीं हुआ। जहां हुए भी संख्या इक्का-दुक्का ही है। बड़ौद, नलखेड़ा, सुसनेर, चंदेरी, नई सराय, आमला, भिंड, अटेर, गोहद, बैरसिया, नेपानगर, बड़ा मलहरा, चंदला, पांडूर्ना, दतिया, बागली, कन्नौद, हाटपिपलिया, बडऩगर, डिंडोरी, सिवनी मालवा, झाबुआ, जावद, पन्ना, राजगढ़, आलोट, जावरा जैसे तमाम शहर हैं, जहां से रेरा में कोई प्रोजेक्ट पंजीबद्ध नहीं हुआ।
जांच और मॉनिटरिंग करना चाहिए
अर्बन एक्सपर्ट कमल राठी का कहना है कि हर छोटे शहर में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, लेकिन वहां तक रेरा की जानकारी नहीं पहुंची। लोग संशय में रहे। अब जांच और मॉनिटरिंग की जाना चाहिए। नियमों के तहत ये अवैध हो गए हैं और इनसे शुल्क लेकर पंजीयन करना चाहिए।
असंगत प्रावधान तो रेरा नियम लागू होंगे
भोपाल। रियल एस्टेट रेग्युलरेटी अथॉरिटी (रेरा) से अपंजीकृत प्रोजेक्ट की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में रेरा अध्यक्ष एंटोनी डिसा ने पीएस वाणिज्यकर मनोज श्रीवास्तव को लिखित में जवाब दिया है कि दूसरे विभाग में कोई असंगत नियम है तो रेरा के प्रावधान लागू होंगे।
दरअसल डिसा ने श्रीवास्तव को पत्र लिखकर रजिस्ट्री के प्रावधान बदलने का निवेदन किया था। इसमें रेरा में पंजीकृत प्रोजेक्ट की ही रजिस्ट्री करने की बात कही थी। इस पर श्रीवास्तव ने किसी तरह के बदलाव की लंबी प्रक्रिया बताते हुए असमर्थता जताई थी। इसके ही जवाब में डिसा ने फिर से पत्र लिखा है। डिसा ने श्रीवास्तव को रेरा एक्ट की धारा ८९ का अध्ययन करने की सलाह भी दी है। इसमें उन्होंने श्रीवास्तव के पत्र के तमाम तर्कों का सिलसिलेवार जवाब दिया और बताया कि पंजीयक रेरा में अपंजीकृत प्रोजेक्ट की रजिस्ट्री से इंकार कर सकता है।
गौरतलब है कि रियल एस्टेट में गड़बडि़यों को रोकने के लिए रेरा एक्ट लागू किया गया है। इसमें रेरा में पंजीयन जरूरी किया गया है। अब पंजीयन विभाग के नियम अलग होने से अपंजीकृत प्रोजेक्ट की रजिस्ट्री नहीं रुक पा रही। यदि रजिस्ट्री जारी रही तो रेरा एक्ट को पूरी सफलता नहीं मिलेगी। इसलिए ही अपंजीकृत प्रोजेक्ट की रजिस्ट्री पूरी तरह रोकने की कोशिश है। इससे अप्रत्यक्ष तौर पर अवैध और नियम विरुद्ध विकसित प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग भी हो जाएगी। डिसा का कहना है कि जो नियमानुसार था वह जवाब दिया गया है।
Published on:
07 Oct 2017 10:07 am
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