वो बस देखता रहा
"कुछ देर पहले तक तो सब ठीक था, अचानक ये क्या हो गया।" टैंक जैसे भट्टी बन गया था, यूनियन कार्बाइड का वो कर्मचारी जब उसके बगल से गुजरा तो उसे लगा कि अब बस ये फट ही जाएगा। ये तो साफ था कि कुछ भयानक हो चुका है बस तस्वीर उसकी आंखों के सामने अभी तक नहीं थी। फिलहाल जान बचानी है तो यहां से भाग जाना ही ठीक ही रहेगा, ये सोचकर वो फैक्ट्री से बाहर निकल चुका था।
तो क्या अब फैक्ट्री खाली थी, नहीं..खाली नहीं थी फैक्ट्री। 40 टन मिथायल आइसोसायनाइड का कुछ हिस्सा हवा में मिल चुका था, बाकी हिस्सा टैंक नंबर 610 से बाहर निकलने को मचल रहा था। इवेकुएशन यूनिट से वो अभी भी बाहर निकल रहा है।
कुछ ही मिनट पहले नाइट शिफ्ट वाले कर्मचारी बात कर रहे थे..शायद टैंक नंबर 610 है..हां..हां यही है..अरे पानी मिल गया है उसमें..देखो कुछ गड़बड़ है क्या..अरे दूर रहो उससे, फट जाएगा। क्या करें..कुछ नहीं..सब ठीक हो जाएगा..अरे नहीं..गैस लीक हो रही है..तू क्या देख रहा है..निकल यहां से..मरना है क्या..
तो मौत ऐसी भी होती है