
भोपाल। देश के कई राज्यों मं हो रही पेट्रोल-डीजल किल्लत को लेकर इस दिनों इन प्रदेशों की जनता सहित पेट्रोल पंप संचालक भी परेशान बने हुए हैं। वहीं मध्यप्रदेश के मामले में इसका जो कारण सामने आ रहा है उसके अनुसार आम जनता के हिस्से का ईंधन खासतौर से डीजल का उपयोग उद्योग कर रहे हैं।
जिसके चलते प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत बढ़ रही है। इस तरह का फीडबैक कंपनियों ने सरकार को भेजा है। उद्योगों ने कुछ समय से 70-80प्रतिशत ईंधन की मांग कम कर दी है। इसके चलते सरकार ने इंडस्ट्रियल पेट्रोल-डीजल की खपत और आम जनता के लिए ईंधन के आंकड़े कंपनियों से मांगे हैं।
पंपों से खरीदी-बिक्री के आंकड़े भी तैयार किए जा रहे हैं। उधर, सरकार ने पेट्रोल पंप एसोसिएशन और तेल कंपनियों को आपूर्ति सामान्य करने की नसीहत दी है। शुक्रवार को कंपनियों के अफसरों और एसोसिएशन के पदाधिकारियों को बुलाया गया था।
करेंगे मुआयना
स्टॉक एवं बिक्री को लेकर खाद्य विभाग के अमले को जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारी किसी भी समय पंप पर स्टॉक जांचेंगे। गड़बड़ी मिलने या ग्राहकों को ईंधन नहीं देने पर कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने कंपनियों से कहा- आपूर्ति करें बहाल
भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि रिलायंस कंपनी के डिपो को सुबह 7 से रात 11 बजे तक ईंधन की सप्लाई करें। जरूरत होने पर एस्मा भी लगाया जा सकता है। खाद्य विभाग के पीएस फैज अहमद किदवई के अनुसार संबंधितों से किल्लत दूर करने को कहा गया है।
निजी पेट्रोल पंप परिचालन में अब नहीं कर सकेंगे कटौती
इधर, नई दिल्ली में सरकार ने ईंधन के निजी खुदरा विक्रेताओं पर लगाम कसने के लिए सार्वभौमिक सेवा उत्तरदायित्व (यूएसओ) के दायरे को बढ़ा दिया है। दूरदराज के इलाकों समेत पंपों पर पेट्रोल-डीजल की बिक्री सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। यह कदम मप्र, राजस्थान, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में सार्वजनिक क्षेत्र की फर्मों की ओर से संचालित कुछ पंपों पर मांग बढऩे और स्टॉक खत्म होने के बाद उठाया गया है। तेल मंत्रालय ने कहा है कि नियमों का पालन नहीं करने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
Updated on:
18 Jun 2022 11:09 am
Published on:
18 Jun 2022 11:06 am
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