
भोपाल। मध्य प्रदेश बाघों के आसान शिकार के लिए इंटरनेशनल शिकारियों की सबसे महफूज जगह बन गया है। यही कारण है कि यहां बाघों के शिकार की घटनाएं सुर्खियों में बनी रहती हैं। अब तक टाइगर स्टेट कहते हुए हमें जहां गर्व महसूस होता था, वहीं आज शर्मिंदगी और अफसोस भी होगा कि इस साल देश में सबसे ज्यादा मौतें इसी अजब-गजब एमपी में दर्ज की गई है। वहीं पकड़े गए शिकारियों से पूछताछ में हुए इंटरनेशनल गिरोह के एक्टिव होने के खुलासे के बाद केंद्र सरकार ने एमपी समेत देश के 8 टाइगर रिजर्व में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। इसके साथ ही तीन बाघ बहुल वन क्षेत्रों में भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
इन आठ टाइगर रिजर्व में किया रेड अलर्ट
आपको यह जानकर वाकई अफसोस होगा कि वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के मुताबिक बाघों की मौतों के मामले में एमपी नंबर वन पर है। टाइगर रिजर्व में अंरराष्ट्रीय शिकारी गिरोह के घुसने के इनपुट के बाद केंद्र सरकार ने विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट पार्क और राजाजी पार्क समेत एमपी, उत्तराखंड, यूपी और कई राज्यों में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। इसके साथ ही तीन बाघ बहुल वन क्षेत्रों में भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
पकड़े गए तस्करों से मिली जानकारी के बाद किया अलर्ट
वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के एडिशनल डायरेक्टर एवी गिरिशा ने संबंधित राज्यों के पीसीसीएफ-वाइल्ड लाइफ, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन और रिजर्व निदेशकों को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में लिखा गया है कि हाल में देश के कुछ हिस्सों में वन्यजीव अंगों के साथ कुछ तस्करों को पकड़ा गया है। उन तस्करों से पूछताछ में कई इन नेशनल और इंटरनशनल तस्करों के बारे में कई खुलासे हुए हैं।
इस साल मारे गए 99 बाघ, एमपी में सबसे ज्यादा
इस साल अब तक देश में 99 बाघ मारे गए हैं। जिनकी मौत का कारण या तो शिकार था या दुर्घटना, आपसी संघर्ष या फिर कोई अन्य कारण। लेकिन सबसे ज्यादा बाघ एमपी में मारे गए। इन 99 बाघों में से अकेले एमपी में पिछले छह महीने में 26 बाघों की मौत हो चुकी है। तो दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र का नाम है। यहां 19 बाघ मौत की नींद सोए हैं। तीसरे नंबर पर उत्तराखंड यहां 12 बाघ मर चुके हैं। वहीं कुमाऊं में सात मौतें दर्ज की गई हैं। इस मामले में राज्य सरकार के साथ ही केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय भी जांच बैठा चुका है।
शिकारियों का नेटवर्क ऐसे करता है काम
जानकारी के अनुसार एमपी में बाघों का शिकार करने के लिए शिकारियों का पूरा एक नेटवर्क है। जो स्थानीय कर्मचारियों से शुरू होता है और नेशनल-इंटरनेशनल शिकारियों पर खत्म होता है। खुद अधिकारी बताते हैं कि टाइगर रिजर्व के निचले स्तर के कर्मचारियों की मदद से इन घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। इन कर्मचारियों का संपर्क आसपास के स्थानीय शिकारियों के साथ होता है और इन शिकारियों का संपर्क नेशनल और इंटरनेशनल शिकारियों से होता है। इनमें कुछ प्रमुख स्थान हैं जैसे सतपुड़ा टाइगर रिचर्व के पास इटारसी रेलवे जंक्शन, बांधवगढ़ के पास कटनी जंक्शन, कान्हा के पास जबलपुर, ये ऐसी जगह हैं जहां शिकारी हमेशा अपने ऑपरेशन चलाते हैं। जैसे ही उन्हें परिस्थितियां अपने अनुकूल लगती हैं, वे तब वे मौका देखकर शिकार करते हैं और फरार हो जाते हैं।
स्थानीय कर्मचारियों की मदद से ही ये शिकार
एमपी में टाइगर रिजर्व में घुसकर बाघों का शिकार करने वाले ये नेशनल और इंटरनेशनल शिकारी इन बाघों के अंगों को काटकर बेचते हैं। यही नहीं शिकार के बाद बाघों के ये अंग चीन और आसपास के देशों तक भेजे जा रहे हैं। हाल ही में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बाघ का शिकार हुआ था। शिकार वाले इस स्थान से 9 किलोमीटर तक सिर्फ पैदल ही पहुंचा जा सकता है। लेकिन इस मामले में रिटायर्ड जिम्मेदारों की मानें तो कोर एरिया में बाहरी शिकारी पहुंच ही नहीं सकते। इसीलिए ये स्थानीय कर्मचारियों की मदद से ही ये शिकार कर सकते हैं।
2015 में इंटरनेशनल शिकारी जेई तमांग पहुंचा था इटारसी तक
एमपी में आए दिन बाघों का शिकार कर उनके अंग काटकर उनकी तस्करी करने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। 2015 में ऐसा पहली बार हुआ था जब यह पता चला कि एमपी में इंटरनेशनल शिकारी गिरोह का जेई तमांग बाघ का शिकार करने इटारसी तक आया था। तब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बाघ का शिकार कर उसके अंगों को दूसरे देशों में भेजा गया था। इस मामले में पुलिस ने 27 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। लेकिन तस्कर तमांग आज भी फरार है और इसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस तक जारी किया था। - वहीं 2021 में पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ हीरा का शिकार कर शिकारी इसकी स्कीन और सिर काटकर ले गए थे। - 2020 में पन्ना में नर बाघ पी-१२३ का सिर कटा शव मिला था
Updated on:
01 Jul 2023 02:50 pm
Published on:
01 Jul 2023 02:27 pm
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