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डॉ. प्रकाश बरतूनिया को मिला राष्ट्रकवि नटवरलाल स्नेही सम्मान

35 वर्षों से हिंदी की सेवा में जुटे हैं डॉ. प्रकाश बरतूनिया...

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भोपाल

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Arvind jain

Jan 25, 2019

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डॉ. प्रकाश बरतूनिया को मिला राष्ट्रकवि नटवरलाल स्नेही सम्मान

भोपाल. हिंदी के लाल और बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रकाश बरतूनिया को इस वर्ष के राष्ट्रकवि नटवरलाल स्नेही सम्मान से अलंकृत किया गया है। राजधानी के चूनाभट्टी क्षेत्र में रहने वाले डॉ. बरतूनिया वर्ष 1984 से हिंदी की सेवा करते आ रहे हैं। वे हस्ताक्षर भी हिंदी में करते हैं और विदेशों में भी उन्हें हिंदी प्रयोग करने में कोई परेशानी नहीं आई।

उन्हें देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों से अभी तक कई सम्मान व पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्रसंघ की यूनिसेफ, यूनेस्को, एनडीडीआइ एवं आइसीसीएसओआर से संबंद्ध अंतर्राष्ट्रीय विश्व शांति संघ द्वारा राष्ट्रीय हिंदीसेवी सहस्त्राब्दि सम्मान के लिए 17 सितम्बर 2000 को नई दिल्ली में स्वर्ण पदक एवं प्रमाण-पत्र से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. बरतूनिया राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान (रूसा) के सदस्य, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय की गवर्निंग बॉडी एवं ईसी सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के ईसी सदस्य, मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग के पूर्व सदस्य, मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक स्थाई समिति के सदस्य, भोज मुक्त विश्वविद्यालय एकेडमिक परिषद के पूर्व सदस्य, मप्र शासकीय विश्वविद्यालय के नए कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी सदस्य, भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत केन्द्रीय विवि के कुलपति की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति ने उन्हें सर्च कमेटी का संयोजक नियुक्त किया है।

डॉ. बरतूनिया मप्र शासन के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नानाजी देशमुख सम्मान 2.00 लाख रुपए नगद, सम्मान पट्टिका वर्ष 2014, 2015 और वर्ष 2016 की चयन समिति के सदस्य रहे हैं। मप्र शासन साहित्य अकादमी के प्रादेशिक नंददुलारे बाजपेई पुरस्कार (आलोचना) वर्ष 2016 के मूल्यांकनकर्ता रहे। संस्कृति संचालनालय के हिन्दी सेवा सम्मान, 2015-2016 एक लाख रुपए नगद, प्रशस्ति पट्टिका, शाल और श्रीफल, चयन समिति ज्यूरी सदस्य, उप्र हिन्दी अकादमी द्वारा घोषित भारत-भारती सम्मान सहित अन्य सम्मानों एवं पुरुस्कारों के चयन के निर्णायक मंडल ज्यूरी के सदस्य हैं। डॉ. बरतूनिया गुजरात विद्यपीठ में व्याख्याता रहे। आईडीबीआइ बैंक के एजीएम पद से ऐच्छित सेवानिवृत्ति लेने से पहले उन्होंने बैंकों में हिंदी के प्रचार-प्रसार व प्रयोग में बहुत बड़ी भूमिका का निर्वहन किया। वे केन्द्रीय सचिवालय, हिंदी परिषद नई दिल्ली और मप्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के सदस्य हैं। उन्हें विशिष्ट हिंदी सेवी सम्मान, दुष्यंतकुमार पांडुलिपि संग्रहालय के भाषा सम्मान, अतिथि एवं प्रभारी विश्व हिंदी सम्मेलन में रह चुके हैं। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के सभी बैंकों में हिंदी के कार्यान्वयन के लिए प्रथम स्थान और राजभाषा शील्ड के लिए पुरस्कृत किया गया।