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बुजुर्गों का सम्मान, हमारी महान संस्कृति की धरोहर: राज्यपाल

माता-पिता, बड़े-बुजुर्गों का सम्मान हमारी महान संस्कृति की धरोहर है। उनके प्रति आदर और संस्कार घर से ही विकसित होते है।

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Respect for elders, heritage of our great culture: Governor

Respect for elders, heritage of our great culture: Governor

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

भोपाल. माता-पिता, बड़े-बुजुर्गों का सम्मान हमारी महान संस्कृति की धरोहर है। उनके प्रति आदर और संस्कार घर से ही विकसित होते है। यह बात अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर प्रशासनिक अकादमी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कही। उन्होंने रामायण में उल्लेखित माता-पिता और बुजुर्गों के सम्मान पर आधारित प्रसंगों का भी जिक्र किया। इस मौके पर मध्यप्रदेश राज्य मानव अधिकार आयोग विषय पर आधारित "वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, सुरक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी, कानूनी सुरक्षा और मानव अधिकार" 'स्मारिकाÓ का लोकार्पण किया। इस मौके पर राज्य मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष ममतानी ने राज्यपाल को पौधा और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया।

परिजन बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता और कृतज्ञता का भाव रखें

राज्यपाल ने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ बुजुर्गों को अपने खान-पान और सेहत का विशेष ध्यान रखना होता है। परिजन बुजुर्गों के प्रति हमेशा संवेदनशीलता और कृतज्ञता का भाव रखें। उन्होंने मानव अधिकारों के संरक्षण के प्रति जनजागरण के प्रयासों के लिए आयोग को साधुवाद दिया। राज्यपाल ने कहा कि मानव अधिकार नैसर्गिक अधिकार है। ये अधिकार व्यक्ति का स्वाभिमान, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इन अधिकारों तक समाज के अंतिम कड़ी के व्यक्ति की सुलभ पहुंच हो, इसकी जिम्मेदारी सरकार के साथ समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भी है। उन्होंने कहा कि राज्य मानव अधिकार आयोग की भूमिका, मानवाधिकारों के रक्षक और संरक्षक के रूप में है। आयोग वंचित और गरीब वर्ग की आशा और विश्वास के केन्द्र में है। सरकार और समाज का मार्गदर्शक भी है।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान, हमारे संस्कारों और संवेदनशीलता से जुड़ा विषय है। वरिष्ठ नागरिक, हमारे परिवार और समाज के लिए धरोहर होते हैं, अनुभव का खजाना होते हैं। शुक्ल ने कहा बुजुर्ग चलते-फिरते इनसाइक्लोपीडिया होते हैं। उनके पास जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं के समाधान का अनुभव है। बुजुर्ग शारीरिक रूप से कमजोर हो सकते हैं, लेकिन उनका अनुभव अमूल्य है। युवाओं को चाहिए कि वे बुजुर्गों के सान्निध्य में रहें, उनके अनुभव का लाभ लें और उन्हें सम्मान दें। इस मौके पर 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों का आयुष्मान कार्ड भी बनाया गया।

मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष मनोहर ममतानी ने कहा कि भारतीय परिवेश में वृद्धजनों के आर्थिक, सामाजिक और वैधानिक संरक्षण किये जाने की आवश्कता है। सरकार के साथ-साथ हम लोगों को भी वरिष्ठजनों के सम्मान एवं उनकी सुरक्षा के लिए कार्य करना होगा। आयोग द्वारा नवाचार के रूप में ''आयोग आपके द्वार'' के तहत प्रदेश के 24 जिलों में शिविरों का आयोजन कर मानव अधिकार से संबंधित प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया गया।
आयोग के सदस्य राजीव कुमार टंडन, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सोनाली पोक्षे वायंगणकर, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के संचालक राजेश गुप्ता, मानव अधिकार आयोग के पुलिस महानिरीक्षक अशोक गोयल, नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी के महानिदेशक जे.एन. कंसोटिया, न्यायाधीशगण, वरिष्ठजन और आयोग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। पुलिस महानिदेशक (शिकायत एवं मानव अधिकार) डी.सी. सागर, वरिष्ठ नागरिकों के लिए पुलिस विभाग द्वारा बनाए गए सिटीजन ऐप की कार्य प्रणाली बताई।

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