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भोपाल/ भूमाफिया घनश्याम सिंह राजपूत ने अपने रसूख के चलते न सिर्फ रोहित गृह निर्माण सहकारी समिति में हेराफेरी की शिकायत करने वाले जेके जैन को झूठे मामले में फंसाया, बल्कि आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के एक अधिकारी को भी अनाधिकृत तरीके से प्लॉट बेच दिए। गौरतलब है कि दो दिन पहले ईओडब्ल्यू ने घनश्याम सहित 24 जिम्मेदारों के खिलाफ केस दर्ज कर मामले को जांच में लिया है। केस दर्ज होने के बाद रोहित गृह निर्माण समिति में 2003-04 के बाद हुई गड़बडिय़ों ने एक बार फिर तुल पकड़ लिया है।
घनश्याम ने पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल में खूब रसूख दिखाया। यहां तक कि जायज सदस्यों के हक का प्लॉट भाजपा नेताओं को बेच दिए। जब इस मामले की जेके जैन शिकायत अलग-अलग फोरम व एजेंसियों में की तो 2015 में जेके जैन को ही झूठे मामले में फंसा दिया। घनश्याम ने अपने साथी अरविंद शुक्ला के जरिए शाहपुरा थाने में जेके जैन के खिलाफ शिकायत करवाई कि जैन ने समिति के रिकॉर्ड में हेरफेर कर दी है। पुलिस ने भी बिना तफ्तीश केस दर्ज कर बुजूर्ग जैन को जेल भेज दिया गया।
शुक्ला ने जो आरोप लगाए वे जैन ने समिति के अभिलेखों में हेरफेर कर दी, लेकिन जब यह मामला कोर्ट में गया तो 13 पेशियां होने के बाद भी अरविंद शुक्ला उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने समन जारी किया तब उपस्थित हुए। कोर्ट ने जेके जैन पर लगाए गए आरोपों से संबंधित अभिलेख मांगे, लेकिन वह पेश नहीं कर पाया। यह मामला अब भी कोर्ट में विचाराधीन है।
ईओडब्ल्यू के जिस अधिकारी को रोहित गृह निर्माण सहकारी समिति में प्लॉट दिया गया है, वह सीडी सिंह के नाम से आवंटित था। सीडी सिंह, घनश्याम सिंह के ही परिजन है। सोसायटी के रिकॉर्ड में हेरफेर कर सीडी सिंह की जगह ईओडब्ल्यू के अधिकारी को सदस्य बनाकर प्लॉट दिया गया। इस पर सहकारिता विभाग ने आपत्ति भी उठाई थी। इसी तरह घनश्याम ने 29 प्लॉट में के दस्तावेजों में हेरफेर कर कई अन्य लोगों को भी यह प्लॉट बेचे हैं। जबकि वास्तविक सदस्यों को प्लॉट नहीं मिले।
Published on:
15 Dec 2019 11:47 am
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