28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सिर्फ 15 दिन के लिए मिलता है यहां कमरा, मौत नहीं होने पर भेज देते हैं घर

यहां व्यक्ति को महज 15 दिन के लिए कमरा किराये पर मिलता है, अगर इतने दिनों में व्यक्ति की मौत नहीं हुई तो उसे फिर घर भेज दिया जाता है।

3 min read
Google source verification
सिर्फ 15 दिन के लिए मिलता है यहां कमरा, मौत नहीं होने पर भेज देते हैं घर

सिर्फ 15 दिन के लिए मिलता है यहां कमरा, मौत नहीं होने पर भेज देते हैं घर

भोपाल. संसार में काशी ऐसा स्थान है, जहां मृत्यु होने पर इंसान जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है, ऐसे में मोक्ष प्राप्त करने की आस में लोग यहां जाते हैं, लेकिन आश्चर्य की बात है कि यहां व्यक्ति को महज 15 दिन के लिए कमरा किराये पर मिलता है, अगर इतने दिनों में व्यक्ति की मौत नहीं हुई तो उसे फिर घर भेज दिया जाता है। मध्यप्रदेश से भी हजारों श्रद्धालु काशी विश्वनाथ जाते हैं, जहां दर्शन पूजन के साथ गंगा सहित पांच नदियों के संगम में भी स्नान का लाभ भी लेते हैं।

मध्यप्रदेश से काशी जाकर आए कई श्रद्धालुओं ने बताया कि काशी में मुक्ति का भवन हैं, जहां 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को 15 दिन के लिए कमरा मिलता है, अगर 15 दिन में व्यक्ति की मौत नहीं होती है, तो उसे वापस घर भेज दिया जाता है, यहां व्यक्ति की मौत होने पर रोया भी नहीं जाता है, बल्कि खुशियां मनाई जाती है।

मृत्यु चक्र को तोड़ती है काशी
आदि गुरु शंकराचार्य ने चरपत पंजरिका में स्त्रोत लिखा है 'पुनरपि जनमम्, पुनरपि मरणम्, पुनरपि जननि जठरे शयनमम् ।' यानी जीवन एक चक्र है। काशी में मृत्यु इस चक्र को तोड़ती है। यह शास्त्रीय मान्यता है। मान्यता यह भी है कि मृत्यु के बाद जब शव को राम नाम के उद्घोष के साथ श्मशान ले जाया जाता है, तभी भगवान शंकर मरने वाले के सभी बंधन खोलते हैं और कान में मुक्ति मंत्र देते हैं। मोक्षार्थी देश-विदेश से भगवान शिव की नगरी काशी में मोक्ष की कामना लिए देह त्यागने आते हैं। काशी में मोक्ष प्राप्ति के दो प्रमुख स्थान हैं। अस्सी- लंका मार्ग पर मुमुक्षु भवन और दूसरा गोदौलिया के समीप गिरिजाघर चौराहे के पास काशी लाभ मुक्ति भवन। इन दोनों ही जगह एडवांस बुकिंग होती है।

10 कमरों का भवन, परिवार सहित रह सकते हैं

जानकारी के अनुसार काशी लाभ मुक्ति भवन का निर्माण 1958 में डालमिया परिवार की रानी जडिय़ा देवी ने कराया था। बताया जाता है कि लोग यहां जीवन मरण के चक्र से मुक्ति अब भी यह डालमिया परिवार की देख-रेख में चलता है। भवन में 10 कमरे हैं। यहां 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को ही सिर्फ 15 दिन के लिए कमरा मिलता है। इन 15 दिन में मौत नहीं होने और स्वास्थ्य में सुधार पर मोक्षार्थी को घर भेज दिया जाता है। स्वास्थ्य स्थिर हो तो 15 दिन की मोहलत मिलती है। मोक्षार्थी को परिवार सहित रहने की सुविधा दी जाती है। ट्रस्ट गैस चूल्हा, बर्तन आदि मुहैया कराता है। इसके बदले प्रतिदिन 20 रुपए का चार्ज देना होता है।

हमेशा भरे रहते हैं सभी 10 कमरे

लाभ मुक्ति भवन के कर्मचारी कालिकांत दुबे ने बताया कि भवन के सभी कमरे हमेशा भरे रहते हैं. लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई 11 वां व्यक्ति देह त्यागने की इच्छा से आए और उसे स्थान न मिले। कमरा नए मोक्षार्थी के आने से पहले खाली हो जाता है। मरने के बाद यहां शोक नहीं, खुशी मनती है। रुदन- क्रंदन नहीं होता है।

नित्य गीता और रामायण का पाठ

भवन में शिव-पार्वती, गणेश, राम दरबार, कृष्ण दरबार हैं। यहां नित्य प्रात: 4-5 बजे तक आरती होती है और 5-6 बजे तक भजन। इसी तरह शाम को 6-8 बजे तक कीर्तन, 8-9 बजे तक आरती और रात 10 बजे शयन आरती होती है। पूजा के बाद मोक्षार्थी को तुलसी, गंगा जल आदि मिलता है। गीता और रामायण का पाठ भी होता है।

Story Loader