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आयुष कर्मचारियों के लिए बने नियम.. देखें पूरा मामला!

पत्रिका एक्सपोज ने उठाया था मामले

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ayush

आयुष कर्मचारियों के लिए बने नियम.. देखें पूरा मामला!

भोपाल। आयुष विभाग के सैकड़ों कर्मचारियों के हित में बड़ी खबर है। शासन ने तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सेवा-भर्ती नियम जारी कर दिए हैं। अब उनकी मांग ब्रह्मस्वरूप समिति के शेष कर्मचारियों को लाभान्वित करने की है। उल्लेखनीय है कि आयुष विभाग के कर्मचारी सेवा-भर्ती नियम न बनने के चलते विगत 16 वर्षों से परेशान थे। आयुष विभाग के अंतर्गत आयुर्वेद के सात और यूनानी व होम्योपैथी के एक-एक कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं।

आयुर्वेद कॉलेजों में लगभग 700 और होम्योपैथी व यूनानी कॉलेजों में 300 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों को समयमान-वेतनमान और ब्रह्मस्वरूप समिति की सिफारिशों का लाभ नहीं मिल पा रहा था। सेवा-भर्ती नियमों की फाइल एक विभाग के दूसरे विभाग के अधिकारियों की टेबल पर वर्षों से घूम रही थी।

इस मुद्दे को पत्रिका एक्सपोज ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। विभाग में ये कर्मचारी वर्ष 2002 से काम कर रहे थे, लेकिन उनके सेवा-भर्ती नियम नहीं बनाए गए थे। कई कर्मचारियों की नौकरी बिना सेवा-भर्ती नियमों के पूरी हो चुकी है। कई रिटायर होने के नजदीक हैं, लेकिन उन्हें सेवा-भर्ती न होने के कारण लाभ नहीं मिल सका। इसके साथ ही इन कर्मचारियों को ब्रह्मस्वरूप समिति का लाभ भी नहीं मिला।

चिकित्सा शिक्षा में जो लोग रेगुलर किए गए थे, उन्हें तीन-तीन वेतनमान का लाभ मिल चुका है लेकिन, इन कर्मचारियों को पदोन्नति व वेतनमान-समयमान का लाभ भी नहीं मिल पा रहा था। मप्र राज्य कर्मचारी संघ (आयुष प्रकोष्ठ) के प्रदेश प्रमुख शिवकुमार शर्मा व आयुष कर्मचारी नेताओं शिवेन्द्र सिंह चौहान, जयमाला दुबे ने इसके लिए पत्रिका एक्सपोज सहित विभागीय मंत्री जालम सिंह पटेल, प्रमुख सचिव-आयुष शिखा दुबे का आभार माना।

खुश रहने के लिए निकालें तरीके

कहा जाता है कि भोजन जिस भाव से बनाया जाए उसका असर उसमें आता है। खुश रहते हुए अगर भोजन बनाए जाए तो इसका असर पूरे परिवार की सेहत पर नजर आता है। ऐसे में खुश रहने के तरीके खोजने चाहिए। हमारे बुजुर्ग भी बताते आए हैं कि अच्छे मन से बनाया गया भोजन खाने वाले को तृप्ति की अनुभूति तो कराता है और मन में अच्छे विचार पैदा करता है। संयुक्त परिवार में सभी सदस्यों के लिए एक सा भोजन प्यार बढ़ाता था। हर परिवार की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे बेटियों को उच्च शिक्षा व अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के साथ ही अच्छे मनोभाव से भोजन बनाने की सीख भी दें।