
तिली क्षेत्र के आसपास के कुत्ते हुए हिंसक, बच्चों को बना रहे निशाना
सागर. शहर की गली-गली में आवारा कुत्ते लोगों पर हमला कर रहे हैं और नगर निगम अमला पशु अधिकारों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। ऐसे में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के एक प्रोफेसर का पत्र वायरल हो रहा है। जिसमें प्रोफेसर डॉ. सर्वेश जैन ने ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन को पत्र लिखकर मांग की है कि उन्हें सस्ते भाड़े में एक ट्रक उपलब्ध करा दें ताकि शहर में आवारा घूम रहे कुत्तों को पकडकऱ पीलीभीत व सुल्तानपुर उन पशु प्रेमियों के घर छोड़ा जा सके जो इंसानी अधिकार को तबज्जो न देकर पशु अधिकार की बात कह रहे हैं। प्रो. के पत्र पर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी इंदौर से प्रतिक्रिया दी है और उन्होंने भी सीएम डॉ. मोहन यादव को आवारा कुत्तों की समस्या का हल करने की अपील की है। पत्र में उन्होंने कहा है कि सागर सहित पूरे देश में स्ट्रीट डॉग हिंसक हो गए हैं। कुछ पशु प्रेमियों की वजह से कुत्ते बच्चों को नोंच रहे हैं और सरकार चुप बैठी है। नगर निगम से शिकायत करो तो वह पशु क्रूरता निषेध कानून याद आता है लेकिन नागरिकों के अधिकार याद नहीं आते। यदि किसी के बच्चे पर यदि जानवर हमला कर देता है तब भी मानव अधिकार को नहीं बल्कि पशु अधिकार को प्राथमिकता दी जा रही है।
डॉ. सर्वेश जैन ने बताया कि बीएमसी परिसर में चंद माह में ही आवारा कुत्तों की संख्या 2 से बढकऱ 25-30 हो गई है। विगत दिन ही 2 कर्मचारियों के बच्चों पर कुत्तों ने हमला किया और उनके हाथ, पैर चबा लिए। हर दूसरे दिन परिसर में कुत्ते किसी न किसी पर हमला कर देते हैं। कई बार नगर निगम अधिकारियों से बैठकों पर चर्चा की, शिकायतें की लेकिन आज तक कोई कर्मचारी कुत्तों को पकडऩे नहीं आया। ऐसे में उन्होंने मप्र ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष सीएल मुकाती को पत्र लिखकर मांग की है कि उन्हें कम भाड़े पर एक ट्रक उपलब्ध कराएं ताकि शहर के आवारा कुत्तों को पकडकऱ सुल्तानपुर, पीलीभीत व अन्य पशु प्रेमियों के घर भिजवाया जा सके जो पशु अधिकारों की वकालत कर इंसानों के अधिकार नहीं बताते। उधर पत्र मिलते ही ट्रांसपोर्ट यूनियन ने सीएम डॉ. मोहन यादव को पत्र लिख दिया है। मांग की है कि सागर सहित पूरे प्रदेश में स्ट्रीट डॉग की समस्या हल की जाए।
मेडिकल वेस्ट खाकर हिंसक हुए कुत्ते-
डॉक्टर्स की माने तो तिली अस्पताल और बीएमसी के आसपास की कॉलोनी में कुत्ते ज्यादा ङ्क्षहसक हो गए हैं। कहीं न कहीं ये जानवर अस्पताल परिसर में रखे मेडिकल वेस्ट के कचरा कचरादानों तक पहुंच जाते हैं और मेडिकल वेस्ट खा लेते हैं। बीएमसी में ही करीब 25-30 कुत्ते बने रहते हैं जो समय-समय पर आसपास की कॉलोनियों में भी इलाका बना लेते हैं। जिला अस्पताल के पीछे तरफ भी अवारा कुत्तों का जमावड़ा बना रहता है। यह कुत्ते गाय, बकरी व शुअर के बच्चों को जिंदा खा जाते हैं और इंसानी बच्चों पर हमले करने में भी पीछे नहीं रहते।
इंसानों से ज्याद कुत्तों की नसबंदी में खर्च-
बीएमसी डॉक्टर्स की माने तो विगत दिनों नगर निगम कमिश्नर के साथ हुई बैठक में भी डॉक्टर्स ने यह चिंता जाहिर की थी। जिसमें निगम अधिकारी ने बताया था कि कुत्तों की नशबंदी के लिए करीब 17 हजार प्रति कुत्ता का खर्च आता है। यानि इंसानी नसबंदी से मंहगा कुत्ता की नसबंदी कराना होता है। इसके अलावा यदि बजट जुटा भी लिया जाए तो नसबंदी अभियान के बाद समाज सेवी संस्थाएं एक्टिव हो जाती हैं। कोर्ट, कचहरी, नोटिस का जवाब देने में अधिकारियों को भी पसीना छूट जाता है। ऐसे में अधिकारी भी पशु अधिकार का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्रि कर लेते हैं।
नगरीय क्षेत्रों में ज्यादा डॉग बाइट केस-
जिला अस्पताल में जहां हर दिन 25-30 मरीज पहुंचते हैं, वहीं बीएमसी में भी 15-20 रेबीज इंजेक्शन का उपयोग हो रहा है। इसके अलावा मकरोनिया, बंडा, शाहगढ़, गढ़ाकोटा, रहली, खुरई, बीना, देवरी, राहतगढ़ सहित तमाम नगरीय क्षेत्र की अस्पताल में प्रतिदिन डॉग बाइट के 5-6 औसत मरीज पहुंचते हैं।
बीएमसी परिसर में लंबे समय से कुत्तों का आतंक बना हुआ है। झुंड बनाकर कुत्ते बच्चों पर हमला कर रहे हैं। नगर निगम को भी कई बार शिकायतें की लेकिन कुत्तों का आतंक जारी है।
प्रो. डॉ. सर्वेश जैन, सदस्य बीएमसी रेसीडेंट कॉम्पलेक्स समिति।
Published on:
17 Feb 2024 08:33 pm
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