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नर्मदा मैया ने ठीक की आंखें, रोजे रखते हुए परिक्रमा पर निकले सलीम, घाट पर पढ़ते हैं नमाज

ऐसे समय में जब हर कहीं नफरत का माहौल बनाया जा रहा है तब एक मुस्लिम नर्मदा परिक्रमा पर निकल पड़े हैं।

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मुस्लिम ने नर्मदा की सेवा में समर्पित किया जीवन

भोपाल. ऐसे समय में जब हर कहीं नफरत का माहौल बनाया जा रहा है तब एक मुस्लिम नर्मदा परिक्रमा पर निकल पड़े हैं। महाराष्ट्र के रहनेवाले सलीम इस्माइल पठान को विश्वास है कि नर्मदा मैया के कारण उनकी आंखें ठीक हुई हैं इसलिए वे परिक्रमा कर रहे हैं. रमजान माह में वे रोजा रखते हुए भी कई किमी का पैदल सफर कर रहे हैं. नर्मदा घाटों पर सुबह—शाम पूजापाठ, भजन-कीर्तन करते हुए नमाज भी पढ़ते हैं।

मालेगांव निवासी 51 वर्षीय सलीम ने अपना पूरा जीवन ही मां नर्मदा को अर्पित कर दिया है। नर्मदा परिक्रमावासियों के साथ घूमते सलीम ने बताया कि 11 साल की उम्र में स्कूल जाते समय उनकी आंखों में धूल चली गई थी। आंखें मसलने से इनकी ज्योति चली गई। खूब उपचार कराया लेकिन कोई परिणाम नहीं मिला। 14 साल नेत्रहीनता के साथ बिताने के बाद एक दिन स्वामी जनार्दन गिरि के शिष्य उन्हें स्वामी शांतिगिरि महाराज के पास ले गए।

स्वामी शांतिगिरि ने फल-फूल आदि से 21 दिन तक सलीम के शरीर का शुद्धिकरण कराया। इसके बाद 8 दिन मौनव्रत का संकल्प देकर मां नर्मदा का मंत्र दिया। सलीम के अनुसार नर्मदा मैया की कृपा से 10—12 दिनों में ही उनकी आंखों की रोशनी लौट आई, उन्हें सबकुछ दिखाई देने लगा। इसके बाद उन्होंने ताउम्र नर्मदा मैया की सेवा करने का निर्णय ले लिया।

सुबह-शाम पूजापाठ, भजन-कीर्तन करते हैं और नमाज पढ़ने के साथ रोजा भी रखते हैं- 16 साल में यह उनकी चौथी नर्मदा यात्रा है। इसके पूर्व दो बार बाइक से और एक बार पैदल यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने 21 नवंबर 2021 को ओंकारेश्वर से नर्मदा परिक्रमा यात्रा शुरू की थी। सलीम ने बताया कि परिक्रमा के दौरान वे नदी में स्नान के लिए साबुन उपयोग नहीं करते, कपड़े भी नदी में नहीं धोते। उनका एक ही उद्देश्य है नर्मदा नदी स्वच्छ और निर्मल रहे। सलीम पठान सुबह-शाम पूजापाठ, भजन-कीर्तन करते हैं और नमाज पढ़ने के साथ रोजा भी रखते हैं।