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अघोषित ट्रांसपोर्ट नगर बने समरधा-मंडीदीप के बीच ट्रांसपोर्टरों ने बनाया ठिकाना

मंडीदीप में पार्किंग की समस्या से परेशान होकर समरधा से मंडीदीप आने वाली सड़क पर संचालित हो रहे एक दर्जन से ज्यादा ट्रांसपोर्ट

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अघोषित ट्रांसपोर्ट नगर बने समरधा-मंडीदीप के बीच ट्रांसपोर्टरों ने बनाया ठिकाना

अघोषित ट्रांसपोर्ट नगर बने समरधा-मंडीदीप के बीच ट्रांसपोर्टरों ने बनाया ठिकाना

भोपाल. भोपाल और रायसेन जिले की सीमा पर बसा समरधा गांव इन दिनों अघोषित ट्रंासपोर्ट नगर के रूप में विकसित हो रहा है। महज कुछ ही वर्षों में यहां दो दर्जन से ज्यादा ट्रांसपोर्टरों ने अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है। ट्रंासपोर्टरों का मंडीदीप से समरधा पलायन करने के पीछे बड़ी बजह पार्किंग की समस्या है।

यहां आसपास खुला क्षेत्र होने के कारण ट्रांसपोर्ट पर आने वाले वाहन पार्क हो जाते हैं। नगर निगम के वार्ड 85 समरधा से मंडीदीप आने के लिए हाईवे के समानांतर एक सर्विस रोड आता है। इस सर्विस रोड के एक ओर करीब दो दर्जन ट्रांसपोर्टरों ने जमीन खरीद कर स्थाई रूप से अपना ट्रंासपोर्ट का कारोबार यहां शिफ्ट कर लिया है।

ट्रंासपोर्टर बताते हैं कि मंडीदीप में हाईवे पर ट्रंासपोर्ट संचालित करने के दौरान सबसे बड़ी समस्या वाहनों के पार्किंग की थी। इसके अलावा किराए के रूप में मोटी रकम चुकानी पड़ रही थी। ऐसे में समरधा में ट्रांसपोर्ट के लिए आवश्यक एवं पर्याप्त जमीन मिलने के कारण ज्यादातर बड़े ट्रांसपोर्टरों ने यहां अपना ट्रांसपोर्ट कारोबार शिफ्ट कर लिया है।

पार्किंग के लिए है जगह
होशंगाबाद रोड पर समरधा गांव से कलियासोत नदी के पुराने पुल तक करीब आधा किमी क्षेत्र में खुला एवं भारी वाहनों के खड़े होने के लिए पर्याप्त जगह है। यहां ट्रॉसपोर्ट पर लोड-अनलोड होंने के लिए आने वाले वाहन आसानी से पार्क हो जाते हैं। हाईवे से लगा होने से दूसरे शहरों से आने वाली गाडिय़ों को आने-जाने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। यही कारण है कि यहां ट्रांसपोर्ट संचालित हो रहा है।

कई लोगों को मिला रोजगार
समरधा में ट्रांसपोर्टरों के आने से स्थानीय लोगों को रोजगार के भी अवसर प्राप्त हो रहे हैं। कई लोगों ने चाय नाश्ते ही होटलें शुरू कर दी हैं, तो कई लोगों ने वाहनों से संबंधित करोबार भी शुरू कर दिए हैं, जिससे उन्हें फायदा हो रहा है। इसके अलावा जिन लोगों के यहां मकान हैं उन्हें भी किरायेदार मिलने से आर्थिक लाभ हो रहा है।

समरधा से कलियासोत रोड पर एक समय शाम 7 बजे के बाद निकलने में डर लगता था, लेकिन बीते कुछ वर्षों में तेजी से ट्रांसपोर्ट कारोबार शुरू हुआ है, इससे क्षेत्र में रौनक आ गई है। इसके अलावा लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

प्रकाश राय, रहवासी समरधा भोपाल