
दिसंबर का पहला सप्ताह नई सरकार तय कराएगा। शहरवासी नई सरकार से अपने शहर को कई उम्मीदें बांधे हुए हैं। सबसे बड़ी उम्मीद ताल-तलैयाओं के शहर में बड़ा तालाब समेत अन्य तालाबों के ईमानदारी से संरक्षण की है। शहर किनारे लगे 6000 हेक्टेयर के वन क्षेत्र, वन्य प्राणी संरक्षण के साथ शहर को सुनियोजित विकास की राह पर ले जाने के लिए मौजूदा तैयार मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2031 को अधिसूचित करने की है।
अधिसूचित करना बाकी
भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2031 को बीते दो साल में तैयार किया गया। तमाम प्रक्रियाओं के बाद ये शासन के पास अधिसूचित होने के लिए रखा गया है। शहर के विकास के लिए मास्टर प्लान जरूरी है। मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को अधिसूचित करेगी।
बड़ा तालाब-छोटा तालाब भोज वैटलैंड समेत तीन सीढ़ी तालाब और अन्य मिलाकर 14 तालाब है। बड़ा तालाब किनारे ही 400 से ज्यादा निर्माण है, जबकि छोटा तालाब को गंदा पानी संग्रहण का केंद्र बना दिया। नवाब सिद्दिक हसल, मुंशी हसन, मोतिया तालाब के अंदर तक निर्माण हो गए। हैरानी तो ये कि निगम से इनके लिए भवन अनुज्ञाएं तक जारी होने लगी। इनका संरक्षण नहीं हो रहा। ये ताल तलैयाएं खत्म तो शहर की पहचान भी खत्म हो जाएगी। इसपर गंभीर होने की जरूरत है।
शहर किनारे 6000 हेक्टेयर वन क्षेत्र में पीएसपी लैंडयूज से अद्र्ध सार्वजनिक निर्माणों की राह खोली है। बड़े फार्म हाउस के साथ आवास व व्यवसायिक निर्माण हो गए, जबकि यहां 70 से अधिक गुफाएं और 20 से अधिक बाघ है। अन्य वन्यप्राणी भी है। मानवीय घुसपैठ लगातार बढ़ रही। बल्क में पेड़ काटे जा रहे। स्थिति ये कि बाघ आसपास के शैक्षणिक व अन्य परिसरों में नजर आ जाते हैं। धड़ल्ले से चल रहे ट्रैफिक के बीच से वाहनों को गुजरते या रोशनी से बचकर सड$क किनारे बैठे देखा गया है। ये शहर की धरोहर और पहचान है, गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
Updated on:
20 Nov 2023 08:09 am
Published on:
20 Nov 2023 08:06 am
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