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करप्शन खा गया 250 करोड़ का रेशम, सरकार ने जांच कराने से की तौबा

पूर्व पीएस ने भेजा था लोकायुक्त को प्रकरण, एक उपसंचालक हैं निलम्बित

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Anwar Khan

Apr 07, 2016

Silk scam

Silk scam

भोपाल.
प्रदेश सरकार ने अब 250 करोड़ के रेशम घोटाले की लोकायुक्त जांच कराने से किनारा कर लिया है। लोकायुक्त ने जांच के दस्तावेज निर्धारित प्रकिया के तहत भेजने का कहकर लौटा दिए थे, किंतु सरकार ने दस्तावेजों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत लोकायुक्त के पास भेजने से ही इनकार कर दिया है।

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रेशम घोटाले की जांच का प्रकरण पूर्व प्रमुख सचिव प्रवीर कृष्ण ने लोकायुक्त संगठन को जांच के लिए भेजा था। इसे एक मार्च को लोकायुक्त ने निर्धारित प्रक्रिया से भेजने का हवाला देकर लौटा दिया था। इसके बाद इस प्रकरण में विभाग ने अपने स्तर पर ही जांच कराना तय कर लिया। वापस प्रकरण लोकायुक्त को भेजने की बात हुई, तो नकार दिया गया। फिर सेवानिवृत्त आईएएस सुधा चौधरी को प्रकरण सौंपा गया। घोटाले से सरकार की छवि पर असर न पड़े, इसलिए सरकार की मंशा है कि मामले को जैसे-तैसे रफा-दफा किया जाए। इस कारण सेवानिवृत्त आईएएस से जांच करा कर प्रकरण को छोटा करके दबाने की कवायद हो रही है। मामले में करीब एक दर्जन अफसर घिरे हैं, जिन्हें बचाने के लिए अब यह प्रकरण दबाया जा रहा है।

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यह है मामला
रेशम संचालनालय के अधिकारियों ने बीते पांच सालों में रेशम उत्पादन वास्तविक से दो से ढ़ाई गुना तक बता दिया था। कागजों पर ही उत्पादन हुआ और कागजों पर ही खरीदी-बिक्री हो गई। इसमें लाखों कई किस्तों में फर्जी तरीके से आपस में बांट लिए गए। जब मामले में प्रारंभिक जांच हुई तो संचालनालय के ही उपसंचालक आरके श्रीवास्तव की पत्नी के नाम पर रेशम वस्त्र प्रतिष्ठान संचालित पाया गया, जिसके नाम पर लाखों का फर्जी लेन-देन हुआ। इस मामले में आरके श्रीवास्तव को निलम्बित कर दिया गया। प्रकरण में श्रीवास्तव सहित करीब दस अधिकारियों पर आरोप लगे। इस मामले में तत्कालीन आयुक्त एसटी पटैरिया पर भी घोटाले के छींटे आए। आईएएस प्रवीर कृष्ण ने विभाग का पीएस बनने पर इस प्रकरण को खुद लोकायुक्त जांच के लिए भेज दिया था।

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सवाल- रेशम घोटाले की जांच लोकायुक्त को वापस कब भेजी जाएगी?
जवाब-लोकायुक्त संगठन ने जांच लौटा दी है। उसे अब वापस लोकायुक्त को नहीं भेजा जाएगा।
सवाल- लोकायुक्त ने तो तय प्रक्रिया के अनुसार दस्तावेज भेजने को कहा था?
जवाब- एक बार भेज दिए। अब जरूरत नहीं है। हम विभाग स्तर पर ही जांच करा लेंगे।
सवाल- विभाग स्तर पर जांच हो सकती तो फिर पूर्व पीएस ने खुद लोकायुक्त को प्रकरण क्यों भेजा?
जवाब- हमने सेवानिवृत्त आईएएस से जांच कराना तय कर लिया है। इतना काफी है। दोषी को छोड़ेंगे नहीं।
सवाल- क्या 250 करोड़ के घोटाले के लिए सेवानिवृत्त आईएएस की जांच काफी है।
जवाब- इससे ज्यादा की जरूरत नहीं है। विभाग अपने स्तर पर जांच करने में भी सक्षम है।

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