
दिल्ली और यूपी से कंडम वाहन लाकर बना रहे स्कूल बस, मासूम बच्चों की जान से खेल रहे
भोपाल. निजी स्कूल प्रबंधनों की मनमानी के चलते शहर में यूपी और दिल्ली से खटारा बसों को लाकर स्कूल बस के तौर पर चलाने का धंधा खूब फलफूल रहा है। नियम है कि 15 साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी बस को स्कूल बस का परमिट नहीं दिया जाए लेकिन मुनाफाखोरी करने वाले बस ऑपरेटर बगैर परमिट ही इन बसों को शहर के नामी स्कूलों में अटैच कर हर महीने लाखों रुपए किराया वसूल रहे हैं। फिटनेस खराब होने की वजह से इन बसों के पुर्जें कभी भी काम करना बंद कर देते हैं जिसके चलते जानलेवा दुर्घटनाएं सामने आती हैं। परिवहन विभाग के नए सर्कुलर के मुताबिक पहले 20 साल पुराने वाहनों को भी स्कूल बस बनाया जा सकता था लेकिन इसे घटाकर अब अधिकतम 15 साल कर दिया गया है। विभाग ने बगैर परमिट चलने वाली स्कूल बसों को बंद करने और जप्त करने पिछले महीने निजी स्कूल प्रबंधन और यातायात पुलिस को पत्र लिखा था। इस पत्र पर स्कूल प्रबंधनों के अलावा पुलिस विभाग ने भी कोई कार्रवाई नहीं की जिसके चलते खटारा बसें अभी भी सड़कों पर दौड़ रही हैं।
ये हैं फिटनेस के मानक
- ब्रेक लाइट और टर्न लाइट चालू हालत में हो।
- प्रेशर हार्न मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार हो।
- मेक और मॉडल में बदलाव नहीं हो।
- अगले टायर में ग्रिप होना चाहिए। रिमोल्डिंग न हो।
- टूल किट, फस्र्ट बॉक्स व अग्निशामक यंत्र हो।
- बच्चे खिड़की से बाहर सिर न निकालें इसके लिए लोहे की राड या जाली लगी हो।
- गाड़ी के कांच में ही फिटनेस की तारीख, रूट की जानकारी अंकित हो।
- बस जिस स्कूल में चलती हो उसका नाम, फोन नंबर अंकित हो।
- शैक्षणिक संस्थान की बस में सुप्रीमकोर्ट द्वारा तय गाइड लाइन का पालन करना सुनिश्चित हो।
मैजिक एवं आपे में 12 सीट जरूरी
परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक मैजिक एवं आपे में पीला रंग लगाकर स्कूल बस बनाने के मामलों में साफ किया गया है कि इनमें 12 बच्चों के बैठने की जगह होना चाहिए। निर्माता कंपनी की ओर से तैयार डिजाइन के अलावा यदि कोई मॉडीफिकेशन कराया जाता है तो इसे मान्य नहीं किया जा सकेगा। ट्रैवलर एवं बड़ी बसों में 12 से 32 सीटों का होना अनिवार्य है।
लापरवाही के चलते ये हादसे हुए
- मुरैना में प्रायवेट स्कूल से अटैच अवैध ऑटो का एक्सीडेंट हुआ था जिसमें चालक सहित स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी।
- राजधानी भोपाल में भी दो साल पहले बोर्ड ऑफिस चौराहे पर स्कूल बस हादसे में प्रायवेट स्कूल की छात्रा की मौत हो गई थी।
- इंदौर डीपीएस स्कूल की बस एक्सीडेंट में कई बच्चों की मौत हो गई थी।
सीधी बात
अलीम खान, फ्लाइंग स्कवॉड प्रभारी
सवाल- जर्जर स्कूल बसों को कैसे शहर में संचालित किया जा रहा है।
जवाब- बसों को एक साल का परमिट मिलता है लेकिन इसे रिन्यू नहीं कराया जाता, औचक कार्रवाई करते हैं।
सवाल- प्रायवेट स्कूल प्रबंधनों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।
जवाब- स्कूलों में अटैच जर्जर और बगैर परमिट चलने वाली बसों की जानकारी देने के निर्देश हैं लेकिन प्रबंधन से सहयोग नहीं मिलता। डीईओ और पुलिस विभाग को इसकी जानकारी भेजी है।
सवाल- उडऩदस्ता प्रभारी की हैसियत से आपने अब तक क्या एक्शन लिया।
जवाब- शहर के सभी निजी स्कूलों में जाकर बसों का सत्यापन करवा रहे हैं। बगैर परमिट-फिटनेस के वाहनों के जप्ती प्रकरण बनाए जा रहे हैं।
Published on:
15 Oct 2019 11:34 pm
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