
School buses running without speed governors
भोपाल. सरकार १५ साल पुरानी स्कूल बसें बंद करना चाहती है। परिवहन विभाग मोटरयान नियम में बदलाव के लिए प्रारूप जारी कर चुका है, लेकिन स्कूल एसोसिएशन ने इसका विरोध किया है। विभाग के पास ५० से अधिक आपत्तियां आई हैं। स्कूल संचालकों ने अपने आर्थिक हित प्रभावित होने और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढऩे की बात कही है। होशंगाबाद सांसद उदय प्रताप सिंह ने भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने स्कूल बसों की वैधता अवधि २०० साल करने का आग्र किया है।
- डीपीएस स्कूल बस हादसे से लिया सबक
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर डीपीएस बस हादसे के बाद नियम सख्त करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने १५ साल पुरानी बसें बंद करने की घोषणा भी की थी। इसके बाद परिवहन विभाग ने मोटरयान नियम १९९४ में संशोधन के लिए मार्च में प्रारूप जारी कर दावा-आपत्तियां बुलाई थीं। इस पर मध्यप्रदेश शैक्षणिक संस्था समन्वय समिति, रीजनल एसोसिएशन ऑफ स्कूल एफिलेटेड सीआइएसई, मार्निंग स्टार पब्लिक स्कूल ग्वालियर सहित अन्य एसोसिएशन ने आपत्ति दर्ज कराई है।
- आपत्ति के साथ यह दिया तर्क
आपत्ति करने वालों का तर्क है कि लोक सेवा यान के तहत परमिट लेने वाले वाहन पूरे सालभर २४ घंटे चल सकते हैं। जबकि, स्कूल वाहन साल में २०० दिन केवल दो घंटे सड़क पर रहते हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आवेदन में कहा है कि इन वाहनों का वे क्या करेंगे? वाहनों की कमी होने से अभिभावकों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
- भाजपा सांसद भी खिलाफ
होशंगाबाद से भाजपा सांसद उदय प्रताप सिंह भी नियम बदलने के खिलाफ हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में कहा है कि स्कूल बसों का दायरा सीमित है। फिटनेस सहित अन्य कड़ी प्रक्रियाएं ठीक हैं, लेकिन नियम बदले जाने से हजारों बसें बाहर हो जाएंगी। इसका असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ेगा।
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स्कूली बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए मध्यप्रदेश मोटरयान नियम में संशोधन का प्रारूप प्रकाशित किया गया है। दावा-आपत्तियों का परीक्षण कराया जा रहा है। सुनवाई कर गुण-दोष के आधार पर निराकरण किया जाएगा।
- मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, परिवहन विभाग
Published on:
19 Apr 2018 10:04 am
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