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हनी ट्रेप के NGO कनेक्शन के बाद शुरू हुई पड़ताल, स्कूल शिक्षा विभाग ने खंगालना शुरू किया का हिसाब-किताब

सरकार की नजर पिछली सरकार में एनजीओ के नाम पर बांटे गए पैसे पर    

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भोपाल

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Alok Pandya

Nov 28, 2019

बैंकों में बगैर जांच खुल रहे फर्जी खातों से मिल रहा ऑनलाइन फ्रॉड को बढ़ावा

बैंकों में बगैर जांच खुल रहे फर्जी खातों से मिल रहा ऑनलाइन फ्रॉड को बढ़ावा

भोपाल/ हनी ट्रेप कांड के आरोपियों द्वारा एनजीओ के जरिए सरकार से मोटी रकम वसूलने की जानकारी उजागर होने के बाद सरकारी विभागों में पिछले दस साल में एनजीओ को दिए गए काम और उसमें खर्च किए गए पैसे की जानकारी जुटाने का सिलसिला शुरू हो गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में एनजीओ को दिए काम का रिकार्ड खंगालना शुरू कर दिया है। राज्य शिक्षा केंद्र ने इस मामले में सभी जिलों से कहा है कि दो दिन में पूरी जानकारी मुख्यालय भेजे। सरकार की नजर पिछली सरकार में एनजीओ के नाम पर बांटे गए पैसे पर भी है। पूरी जानकारी आने के बाद सरकार काम न करके पैसा हजम करने वाले एनजीओ संचालकों पर कड़ी कार्रवाई कर सकता है।

राज्य शिक्षा केंद्र एनजीओ के माध्यम से दिव्यांग बच्चों के लिए सीडब्ल्यूएसएन (स्टूडेंट फॉर स्पेशल नीड) छात्रावास चलाता है। इसके लिए सरकार प्रति छात्रावास 2 लाख 54 हजार रुपए सालाना सरकार एनजीओ को देती है। प्रदेश में कुल 50 छात्रावास संचलित हैं। वहीं आईईडी गतिविधियां भी राज्य शिक्षा केंद्र एनजीओ के माध्यम से कराता है। स्कूल शिक्षा विभाग की दूसरी शाखाओं ने भी प्रदेश में एनजीओ से कराए गए कामकाज का हिसाब-किताब पूछा है।


स्वपनिल एजुकेशन सोसायटी पर नजर-

हनी ट्रेप कांड की आरोपी श्वेता जैन के पति स्वपनिल जैन की स्वपनिल एजुकेशन सोसायटी नामक एनजीओ से सरकार के कई विभागों में काम किया है। दो साल पहले स्वपनिल ने यह संस्था छोड़ दी थी। इस सोसायटी को पिछल कुछ वर्षों में बहुत सारा सरकारी काम मिला है। सरकार को अंदेशा है कि स्कूल शिक्षा विभाग में भी इस सोसायटी को मोटी पिछली सरकार के कार्यकाल में मिली होगी।

यह बुलाई जानकारी-

सभी जिलों से पूछा गया है कि किस एनजीओ को किस वर्ष में कौनसा काम दिया। यह एनजीओ पंजीकृत है या नहीं। क्या बजट का उपयोगिता प्रमाण पत्र मिला है। यदि नहीं मिला है तो इसके पीछे कारण क्या है।