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RTE के तहत बच्चे को नहीं मिला एडमिशन, तो अब होगी सख्त कार्रवाई, कलेक्टर ने दिया निर्देश

प्रवेश न देने के मामले में कलेक्टर ने दिखाई सख्तीस्कूल संचालकों से दो दिन के अंदर मांगा जवाब, नहीं तो दर्ज की जाएगी एफआइआर

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Free Admission Speed is low under RTE in Singrauli's private school

भोपाल . आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून ( RTE ) के तहत स्कूल ( School ) में प्रवेश ( admission ) देने के नियमों को नहीं मानने वाले पांच निजी स्कूल को जिला प्रशासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

स्कूलों को दो दिन के अंदर लिखित जानकारी देनी होगी कि आरटीई में उन्होंने प्रवेश क्यों नहीं दिया। यदि दो दिन के अंदर जवाब नहीं आया तो स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

उल्लेखनीय है कि पत्रिका ने 11 जुलाई के अंक में आरटीई में चयनित बच्ची और उसके परेशान पिता नीरज वैष्णव की समस्या पर विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। बच्ची और उसके पिता को कटारा हिल्स एक्सटेंशन, रापडिय़ा स्थित एक निजी स्कूल प्रबंधन ने आरटीई में चयनित होने के बावजूद परिसर से बाहर निकाल दिया था।

कलेक्टर के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ ने पांच निजी स्कूलों के खिलाफ शुरू की कार्रवाई, लॉटरी में चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं देने पर निरस्त की जा सकती है मान्यता

आरटीई: लॉटरी के तहत चयनित बच्चे 20 जुलाई तक ले सकेंगे निजी स्कूलों में प्रवेश

आरटीई के तहत निजी स्कूलों की ओर से एडमिशन देने की जा रही गड़बडिय़ों की शिकायतें मिलने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रवेश लेने की तारीख बढ़ाते हुए 20 जुलाई कर दी है। आरटीई में ऑनलाइन लॉटरी के तहत प्रदेशभर में एक लाख 77 हजार विद्यार्थियों को निशुल्क प्रवेश के लिए सीटें आवंटित हुई थीं, लेकिन 10 जुलाई तक सिर्फ 77 हजार विद्यार्थियों ने ही एडमिशन लिया है।

एक लाख से अधिक विद्यार्थी स्कूलों में प्रवेध लेने से वंचित रह गए। इसके चलते विभाग ने तारीख बढ़ाने के साथ यह भी तय किया है कि 20 जुलाई तक भी जिन बच्चों का एडमिशन नहीं होगा उसके लिए सम्बंधित स्कूल ही जिम्मेदार होंगे। राज्य शिक्षा केन्द्र की ओर से गुरुवार को जारी आदेश में प्रवेश की तिथि बढ़ाने के साथ निजी स्कूल 20 जुलाई तक ही ऐप से प्रवेश की रिपोर्टिंग भी कर सकेंगे।

निजी स्कूल प्रबंधनों को प्रशासन की हिदायत

जिला प्रशासन ने निजी स्कूल संचालक और प्राचार्यों को हिदायत दी है कि यदि प्रवेश देने से इनकार किया जाता है तो इसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामले में स्कूल प्रबंधक एवं प्राचार्य के खिलाफ एफआईआर की जा सकती है।

सुनवाई नहीं हो तो कलेक्टर से करें शिकायत

प्रवेश दिलाने की जिम्मेदारी राज्य शिक्षा केंद्र एवं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की है। जांच में सामने आया कि दोनों ही मामले में रुचि नहीं रखते। कलेक्टर ने डीईओ को फटकार लगाते हुए नियमों का पालन कराने के निर्देश दिए हैं। पीडि़त कलेक्टर से मिलकर कर सकते हैं।

आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जवाब देने के लिए उन्हें दो दिन का समय दिया है।
- तरुण पिथोड़े, कलेक्टर