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#Navratri: मां की आंखों के कई रूप, हर रूप की अलग कहानी, रोचक FACT

देवी दुर्गा की प्रतिमा बनाते समय कलाकार उनकी भाव-भंगिमाओं पर खासी मेहनत करते हैं। खासतौर पर उनकी आंखों की बनावट पर ध्यान दिया जाता है।

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Juhi Mishra

Apr 08, 2016

Durga

Durga

भोपाल। मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने वाले कलाकार कठिन नियमों को मानते हुए उनका रूप साकार करते हैं। ऐसी कोई देवी प्रतिमा नहीं बनी जिसकी आंखों में तेज न दिखाई देता हो, लेकिन माटी की इस मूर्ति में ऐसी कौन सी जादूगरी की जाती है कि वह जीवन्त दिखाई देती है। खासतौर पर देवी मां की आंखें...। मूर्तिकार बताते हैं कि देवी प्रतिमा बनाते समय सबसे ज्यादा ध्यान मां की आंखें बनाने में रखना होता है। मूर्ति के भावों के हिसाब से आंखों को डिजाइन किया जाता है। कहते हैं जो भाव मां के चेहरे पर दिखाना है वही भाव मूर्तिकार को अपने मन में साधना होता है। आइए जानते हैं क्या है मां की आंखों की भाषा...


रौद्र आंखें
बनाने में वक्त लगता : ढाई-तीन घंटे,
कलर : लाल,
खासियत: रौद्र आंखों की पुतलियां काफी बड़ी होती हैं। उन्हें एकदम खुला हुआ बनाया जाता है। पलकों की एक-एक लाइन को ऊपर की ओर मिलाया जाता है। कुछ आंखों को महिषासुर की ओर देखते हुए बनाया जाता है और कुछ को भक्तों की ओर।


शांत और सौम्य आंखें
बनाने में वक्त लगता : आधा से डेढ़ घंटा
कलर: यलो और ग्रीन
खासियत: मूर्तियों में यह सबसे ज्यादा कॉमन आंखें होती हैं। कलाकारों का मानना है कि सबसे आसानी से इन्हीं आंखों को बनाया जाता है।


मंदाकिनी या मीनाखी आंखें
बनाने में वक्त लगता है : दो घंटे
कलर : गुलाबी और हल्का नीला
खासियत : मां के पावन रूप को और खूबसूरत बनाने वाली इन आंखों को ज्यादातर कोलकाता की मूर्तियों में देखने को मिलता है। यह कलम की पंखुड़ी के जैसी होती हैं।


आर्टिस्टिक आंखें
बनाने में वक्त लगता है : एक से डेढ़ घंटे
कलर : गुलाबी, हरा, गोल्डन और सिल्वर
खासियत : दुर्गा पूजा में मां की मूर्तियों में इन आंखों का यूज भी सबसे ज्यादा होता है। चार कलर होने के कारण इन आंखों में काफी गहराई महसूस होती है।

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बांग्ला आंखें
बनाने में वक्त लगता है : तीन से चार घंटे
कलर : पीला और गुलाबी
खासियत : परवल के आकार की खिंची हुई लंबी आंखें जिन्हें जिन्हें कारीगर बांग्ला आंखें कहते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान सबसे ज्यादा डिमांड में यही आंखें रहती हैं। मोटी-मोटी ब्लैक आउट लाइन इन आंखों को परवल का रूप दे देती हैं।

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