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भोपाल. पिछले दो महीने से चल रही एमबीबीएस और बीडीएस सीटों के लिए काउंसलिंग के दो चरण बाद भी बीडीएस करीब 60 फीसदी सीटें खाली हैं। डेंटल कॉलेजों से अभ्यर्थियों का इस कदर मोहभंग हुआ है कि तमाम कोशिशों के बावजूद सीटें नहीं भरीं।
सोमवार को दूसरा चरण समाप्त होने तक बीडीएस की 1122 में से 796 सीटें खाली पड़ी थीं। हालांकि इस दौरान एमबीबीएस की 99 फीसदी सीटों पर दाखिला हो गया। एमबीबीएस के 1300 सीटों में से मात्र 34 सीट ही खाली बचीं। अब खाली सीटों को मॉपअप राउंड के जरिए भरा जाएगा। चार डेंटल कॉलेजों में 100 सीटों में सिर्फ15 या उससे कम उम्मीदवारों ने दाखिला लिया है।
इनमें भी कुछ उम्मीदवार अपग्रेडेशन में एमबीबीएस मिलने के बाद सीट छोड़ सकते हैं। कॉलेज संचालकों का कहना है कि कम छात्रों में कॉलेज चलाना काफी महंगा पड़ता है। यही हाल रहा तो कॉलेज बंद कर सकते हैं।
दो लाख रुपए अग्रिम शुल्क के साथ मिलेगी सीट
बाकी बची सीट्स के लिए 21 अगस्त से मॉपअप राउंड की शुरूआत हो रही है। इसमें इच्छुक छात्र 2 लाख रुपए अग्रिम शुल्क के साथ नए सिरे से च्वाइस फिलिंग कर सकता है। इस चरण के बाद बची सीट को कॉलेज स्तर पर भरा जाएगा।
एमडीएस में भी खाली रह गई थीं सीटें
सिर्फ बीडीएस ही नहीं 2016-17 में निजी कॉलेजों में एमडीएस की 189 सीटों में सिर्फ 10 सीटें भर पाईं। इसी तरह से 2017-18 में एमडीएस की कुल 214 सीटों में से 114 खाली रह गईं। यह हाल तब था जब सभी कैटेगिरी के लिए क्वालिफाइंग अंक 7.5 फीसदी कम कर दिए गए थे।
ना नौकरी ना प्राइवेट प्रैक्टिस
विशेषज्ञों की माने तो बीडीएस से मोहभंग होने का सबसे बड़ा कारण नौकरी और प्राइवेट प्रैक्टिस दोनों का ना होना। निजी डेंटल कॉलेजों में फैकल्टी के तौर पर 15 से 20 हजार रुपए ही मिलते हैं। मामले में मप्र डेंटल काउंसिल के वाइस प्रेसीडेंट डॉ. चंद्रेश शुक्ला बताते हैं कि सरकार को चाहिए कि वे आयुष डॉक्टरों की तरह डेंटल डॉक्टरों को भी सीएचसी और पीएचसी में पदस्थ करे।
आंकड़े
दूसरे चरण में स्थिति
1300 सीट - 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज में
720 सीट - 6 निजी मेडिकल कॉलेज में
34 सीट - खाली बचीं सेंकेडं राउंड के बाद
1122 सीट - 14 निजी डेंटल कॉलेज में
796 सीट - खाली बचीं
Published on:
21 Aug 2018, 8:08 AM IST
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