अगर हम इतिहास में देखें तो उस समय कापालिक साधु सबसे कठोर तपस्या करने वाले माने जाते थे। आज भी वह मंत्र, साधना और तप से ही मोक्ष की प्राप्ति करते हैं। ज्यादातर यह कापालिक कुंभ और सिंहस्थ में ही नज़र आते हैं। अगर कोई व्यक्ति कापालिक बनना चाहता है तो वह दुनिया के सभी ऐश-ओ-आराम और अपने परिवार से संन्यास ले लेता है और दोबारा कभी मुड़कर उनकी तरफ नहीं देखता।