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Bhopal हवा, बारिश और तापमान अब सात जगहों से मिलेगा मौसम का सटीक पूर्वानुमान

भोपाल शहर हर के सात अलग-अलग हिस्सों से मौसम की सटीक जानकारी के लिए मौसम विभाग ने व्यवस्था कर ली है। शहर के नेहरू नगर, नीलबड़ और श्यामला हिल्स में से दो स्थानों पर अगले माह तक ऑटोमैटिक एंड इंटेलिजेंट वेदर सिस्टम लग जाएंगे। इसके बाद सात स्थानों से शहर के मौसम का सटीक पूर्वानुमान मिल सकेगा।

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भोपाल. भोपाल शहर का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। शहर के अलग-अलग हिस्से में मौसम का मिजाज कई बार अलग-अलग दिखता है। कहीं बारिश तो कहीं सूखा रहता है। कहीं तूफान आ जाता है तो कहीं बूंदाबांदी होने लगती है। अभी तक भोपाल के हर क्षेत्र के मौसम की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती थी। इसीलिए अब पूरे शहर के सात अलग-अलग हिस्सों से मौसम की सटीक जानकारी के लिए मौसम विभाग ने व्यवस्था कर ली है। शहर के नेहरू नगर, नीलबड़ और श्यामला हिल्स में से दो स्थानों पर अगले माह तक ऑटोमैटिक एंड इंटेलिजेंट वेदर सिस्टम लग जाएंगे। इसके बाद सात स्थानों से शहर के मौसम का सटीक पूर्वानुमान मिल सकेगा।
सात केंद्रों में सिस्टम
मौसम केंद्र ने अरेरा हिल्स और संत हिरदाराम नगर के अलावा नवीबाग, कोलार रोड, बैरसिया में ऑटोमेटिक वेदर सिस्टम लगे हैं। अब शहर के श्यामला हिल्स, नेहरू नगर और नीलबड़ क्षेत्र में से किन्हीं दो स्थानों पर भी यह सिस्टम लगाया जाएगा। अगले दो माह में यह सिस्टम काम करने लगेगा। इसके बाद इन क्षेत्रों से मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
बिजली गिरने की सूचना भी मिलेगी
मौसम विभाग ने लाइटिनिंग सेंसर यानि वज्रपात ***** और इलेक्ट्रिक फील्ड रिकॉर्डर अर्थात जो बिजली बनती है, उसकी तीव्रता मापने की क्षमता वाली मशीनें भी लगाने जा रहा है। वज्रपात के पूर्वानुमान और ओलावृष्टि के पूर्वानुमान को लेकर आइआइटी पटना और इसरो के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है।
जीपीएस से जुड़ा होता है उपकरण
ऑटोमेटिक वेदर सिस्टम के तहत टॉवरनुमा स्वचालित उपकरण जीपीएस से जुड़ा होता है। मौसम की जानकारी के लिए इसमें सेंसर लगे हुए होते हंै। तापमान के लिए थर्मिस्टर, आद्र्रता के लिए आईग्रिस्टर और बारिश के लिए टीबीआरजी सेंसर लगे होते हैं। इसके चलते तापमान, बारिश, हवा की गति सहित अन्य जानकारी मिल जाती है। इसमें हर 15 मिनट में वायुमंडल की स्थिति, तापमान और बारिश सहित अन्य जानकारी अपडेट होती है।
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शहर का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, ऐसे में मौसम का सटीक अनुमान लोगों तक पहुंचे, इसके लिए आगामी दो माह में कम से कम दो स्थानों पर ऑटोमेटिक वेदर सिस्टम लगाए जाएंगे। इससे बारिश के दिनों में कहां अतिवर्षा या तूफान के समय कितनी गति से हवा चलेगी, इसकी जानकारी मिल सकेगी।
डॉ.वेदप्रकाश सिंह,वरिष्ठ विज्ञानी रेडार