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ये लापरवाही पड़ेगी भारी, हॉस्टल के एक रूम में रह रहे 8 स्टूडेंट, हो सकता है ‘कोरोना विस्फोट’

आरजीपीवी न कमरा दे पा रहा न ही पलंग, कोरोना संक्रमण फैलने का भी खतरा

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भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआइटी) में एडमिशन लेने वाले बीटेक फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों को फर्श पर बिस्तर बिछाकर रहना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि एक बड़े कमरे में सात से आठ विद्यार्थी रहने को मजबूर हैं। ये हाल किसी एक कमरे में नहीं बल्कि करीब 100 विद्यार्थी फर्श पर सो रहे हैं।

आरजीपीवी में इन विद्यार्थियों ने जेईई मेंस की मेरिट के आधार पर प्रवेश मिला है। इंस्टीट्यूट प्रदेश के एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय का मुख्य कैंपस में है। यहां कक्षाएं लगना शुरू हो चुकी है। इसलिए विद्यार्थी हॉस्टल में रहने आ गए।

वहीं, बीटेक फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों का आना भी लगा हुआ है। ऐसे में जो विद्यार्थी हॉस्टल की मांग कर रहे हैं उन्हें इसी तरह ठहराया जा रहा है। उन्हें यहां पलंग भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। वे बाजार से ओढ़ने-बिछाने के लिए बिस्तर ले आए। कोरोना संक्रमण की स्थिति में हर विद्यार्थी को अलग रूम देने की बजाए यहां एक साथ इतने विद्यार्थियों को ठहराया जा रहा है।

अभिभावक भी मजबूर

आरजीपीवी में फैली इन अव्यवस्थाओं से अभिभावक भी परेशान और चिंतित हैं। गरीब सामान्य परिवारों से जुड़े होने के कारण अपने बच्चों को इस तरह हॉस्टल में ठहराना कइयों की मजबूरी बन गई है। दरअसल, यह विद्यार्थी प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आकर रह रहे हैं। आने-जाने में ही एक मोटी रकम खर्च हो चुकी है। ऐसे में अपने बच्चों को तत्काल कहीं और शिफ्ट भी नहीं कर सकते। वहीं, विवि जल्द ही रूम में शिफ्ट कराने का आश्वासन ही दे रहा है। लेकिन इसकी तरह रहते हुए विद्यार्थियों को एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है।

फर्नीचर की कमी

छात्रों के कैंपस में वापसी होने के बाद हॉस्टल में फर्नीचर की कमी हो गई है। विवि में नए हॉस्टल तो तैयार हो चुके थे लेकिन विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से समय पर फर्नीचर की व्यवस्था नहीं गई।

राजभवन को कराना चाहिए औचक निरीक्षण

विवि के एक शिक्षक ने बताया कि यहां व्यवस्थाएं बहुत ही खराब हैं। ऑफलाइन कक्षाएं भी सही ढंग से नहीं लग रहीं। इन मामलों की पुष्टि करने के लिए राजभवन और राज्य शासन के अधिकारियों को विश्वविद्यालय का औचक निरीक्षण करना चाहिए। विद्यार्थियों से गोपनीय फीडबैक लेना चाहिए। ताकि प्रदेश के एक मात्र तकनीकी विश्वविद्यालय की हकीकत उनके सामने भी आ सके।

प्रो. सुनील कुमार, कुलपति, आरजीपीवी का कहना है कि हास्टल में विद्यार्थियों की संख्या अधिक हो गई है। इसलिए यह हुआ है लेकिन हमारे पास अभी 65 रूम खाली हैं। इन्हें बांट रहे हैं। पलंग लेने के लिए अभी आदेश किया है। गर्ल्स हॉस्टल से भी पलंग की शिफ्टिंग कराई जा रही है।