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सारंगपाणि झील में छोड़ रहे सीवेज

पिपलानी थाने के पीछे बसी बस्ती के लोग छोड़ रहे घरों का सीवेजबीएचईएल टाउनशिप की एक मात्र सारंगपाणि झील का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। राजधानी के ताल तलैयों में भेल क्षेत्र के इस झील की भी गिनती होती थी। यह बीएचईएल टाउनशिप और यहां के लोगों के लिए शान मानी जानी थी, लेकिन मौजूदा समय में यह अपने अस्तित्व से जूझ रही है।

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पिपलानी थाने के पीछे बसी झुग्गी बस्ती के साथ ही भेल टाउनशिप के कार्यालयों और नालों का पूरा गंदा पानी और सीवेज इसी झील में जा रहा है। यहां साफ-सफाई के हालात यह हैं कि घाटों पर कचरे का ढेर लगा है। झील में हरी काई और गंदगी का अंबार है। समय रहते भेल प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो भेल की इस धरोहर का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

गौरतलब है कि बीएचईएल टाउनशिप बसने के बाद सारंगपानी झील को इस क्षेत्र का पर्यटन स्थल कहा जाता था। यहां भेल में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारियों के परिवार के अलावा बाहर के लोग भी आते थे। इसका नाम भेल के पहले डायरेक्टर के नाम पर सारंगपानी झील पड़ा था। दिन में तीन बजे के बाद यहां पर लोगों का तांता लग जाता था। देर शाम तक बच्चे भी खेला करते थे। धीरे-धीरे अधिकारी बदले, इच्छा शक्ति के अभाव में झील की सफाई होना बंद हो गई। काफी समय से झील की सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। झील के किनारों पर गंदगी का ढेर है। सूत्रों की माने तो सारंगपाणि झील में मछली पालने का ठेका दिया गया है। लेकिन इसकी साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और न ही इसमें मिलने वाली गंदगी रोकी जा रही है।

झील के इस गंदे पानी में धोते हैं कपड़े
सारंगपाणि झील का पानी इतना गंदा हो चुका है कि इसे सीवेज टैंक कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा। यहां झील के किनारे बसी झुग्गी बस्तियों के साथ ही टाउनशिप के कार्यालयों और क्वार्टरों का गंदा पानी और सीवेज नालों के माध्यम से इसी झील में आता है। झीले के पास से उठने वाली बदबू और गंदगी के कारण यहां लोगों को खड़ा होना मुश्किल होता है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा इसी पानी से कपड़े धोकर चमकाए जा रहे हैं। इससे कारण लोगों में बीमारियां फैलने का डर बना है।