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कैप्टन बत्रा ने देशप्रेम के लिए छोड़ दी थी मर्चेन्ट नेवी की नौकरी

कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन से प्रेरणा लेकर युवा पीढ़ी भी आर्मी में आ रही है। विक्रम का भी वैसा ही विचार रहा था, वह चाहते तो बच सकते थे, लेकिन उन्हें कुछ करने का जज्बा था। वह भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद या मंगल पाड़े से बहुत प्रेरित थे। यह कहना है, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता जीएल बत्रा का। वह शहीद दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम के लिए भोपाल आए हैं।

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भोपाल। जीएल बत्रा कहते हैं कि विक्रम बचपन में मुझे कहानी सुनाने को कहता था, तो मैं उसे बहादुरों की कहानी सुनाता था। इसके अलावा धार्मिक कहानियां भी सुनाता था, इसमें भगवान राम और कृष्ण की कहानियां थी। बचपन से ही विक्रम में देशभक्ति और देश प्रेम की भावना थी। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से बीएससी की, उसी समय विक्रम का मुद्दा था कि कमीशन लेना है। इस दौरान मुझसे कहने लगे कि पिताजी मैं एमए इंग्लिश ज्वाइन कर लेता हूं, क्योंकि चंडीगढ़ में रहकर यूपीएससी की तैयारी करना है। एमए इंग्लिश के पेपर की आंसर शीट के हर पेज पर जय भारत, जय भारत लिख करके टाइम पास करता था।

मर्चेंट नेवी में सिलेक्शन के बाद छोड़ दी थी नौकरी

इस बीच विक्रम का मर्चेंट नेवी के लिए सिलेक्शन हो गया था, लेकिन नौकरी छोड़ दी। वहीं विक्रम की मां ने कहा भी कि मर्चेंट नेवी में नौकरी लग गई है आने वाले समय में शिप कैप्टन बन जाओगे। इस दौरान विक्रम ने मां से कहा कि आपको पैसा ज्यादा चाहिए क्या। मां ने कहा कि आप ही तो हमारी दौलत हो। जीएल बत्रा कहते हैं कि युद्ध के दौरान 5140 चोटी पर विजय प्राप्त की थी, तब मुझसे बात की थी। उनके कमांडर ने विक्रम से पूछा कि आप जीत जाते है तो क्या बोलेंगे, वही पर उन्होंने नारा दिया था ये दिल मांगे मोर...।

अमर क्रांतिकारियों के बलिदान का पाठ पढ़ाया जाएगा
रवीन्द्र सभागम केंद्र में आयोजित स्मृति प्रसंग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ब्रिटिश सरकार भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव से इतनी घबराई थी कि समय से पहले ही फांसी दे दी। मैं अमर शहीदों के चरणों में अपनी श्रद्धा के सुमन अर्पित करता हूं। भगत सिंह कहते थे कि स्वतंत्रता व्यक्ति का कभी खत्म न होने वाला अधिकार है। वह फांसी वाले दिन भी बिना भय के मस्ती से किताब पढ़ रहे थे। इस मौके पर सीएम ने ऐलान करते हुए कहा, भोपाल की मनुभावन टेकरी पर सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमा लगाई जाएगी और स्मारक बनेगा। पाठ्यक्रम में तीनों अमर क्रांतिकारियों के बलिदान का पूरा पाठ पढ़ाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें। इस मौके पर करगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन विक्रम बत्रा व कैप्टन मनोज पाण्डेय के परिजन भी मौजूद थे।