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हिन्दी मीडियम से स्टडी कर रचना शर्मा बनी डिप्टी कलेक्टर, आइएएस ऑफिसर बनना है लक्ष्य

परिवार कराना चाहता था शादी, मां व पिता डटे रहे, बेटी ने हासिल की स्टेट में सेकंड पोजिशन

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राजनंदिनी

भोपाल। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा परीक्षा-2018 के रिजल्ट शनिवार को घोषित कर दिए। 298 पदों के लिए आयोजित परीक्षा के इंटरव्यू 31 दिसंबर से 23 जनवरी तक हुए थे। आयोग ने महज तीन दिन में ही माक्र्स घोषित कर दिए।

परीक्षा में आरजीपीवी से ईसी ब्रांच में इंजीनियरिंग करने वाली मूलत: होशंगाबाद की रहने वाली रचना शर्मा ने सामान्य कैटेगरी में टॉप किया है, उन्हें 976 माक्र्स के साथ ओवरऑल सेकंड पोजिशन हासिल हुई है। रचना डिप्टी कलेक्टर बनकर यूपीएससी की तैयारी भी करेंगी। उनका सपना आइएएस ऑफिसर बनने का है। इससे पहले उनका चयन एमपी फॉरेस्ट-2018 में रेंजर के पद पर हो चुका है।

रचना का ये सफर इतना आसान नहीं था। आरजीपीवी में थर्ड ईयर की पढ़ाई के दौरान ही परिवार के सदस्य का प्रेशर था कि बेटी की शादी कर दो। स्कूल टीचर पिता के साथ मां ने बेटी की इच्छा के लिए परिवार की बात नहीं मानी। रचना ने 2015 से यूपीएससी की कोचिंग शुरू की। दो बार लगातार प्रयास के बाद वे मेंस तक पहुंची।

उन्होंने एमपीपीएससी का पहली बार एग्जाम दिया। पहले अटैम्ट में सेकंड रैंक हासिल हुई। रचना का कहना है कि 12वीं क्लास के दौरान पिता की पोस्टिंग होशंगाबाद में हुई तो वे एसपी बंगले के सामने रहने लगे। उस दौरान आइपीएस दीपिका सूरी एसपी थी। उन्हें देख मन में ऑफिसर बनने का सपना जागा।

सेल्फ स्टडी के साथ बेसिक्स पर फोकस
रचना को 12वीं में स्टेट में सातवीं रैंक मिली थी। वहीं, आरजीपीवी में चांसलर अवार्ड भी मिल चुका है। रचना ने सेल्फ स्टडी पर फोकस किया। रचना का कहना है कि एग्जाम में जीएस के तीन और एथिक्स का एक पेपर होता है। करंट अफेयर्स पर फोकस कर सफलता पाई जा सकती है। पिछले सालों के पेपर्स सॉल्व करने से पैटर्न का पता चल जाता है। सिलेबस से ही पढ़ाई करने से सफलता आसानी से मिल सकती है। वहीं, फैक्चुअल पर ध्यान देने के साथ खुद के तैयार किए नोट्स पर भी फोकस करना चाहिए। ये ध्यान रखें कि एग्जाम से पहले कम से कम दो बार रीविजन हो जाए। तीन घंटे में 56 प्रश्न सॉल्व करने के लिए स्पीड बढ़ाने की भी प्रैक्टिस करें।

राजनंदिनी की थर्ड पोजिशन
जबलपुर की रहने वाली राजनंदिनी ने भोपाल मैनिट से साल 2016 में बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स में पूरी की। राजनंदिनी बताती हैं, कैंपस इंटरव्यू के दौरान बोर्ड में इंटरव्यूअर को कह भी दिया था कि मुझे जॉब मिल भी गई तो ज्वॉइन नहीं करूंगी। उसे वक्त उन्हें पांच लाख का शुरुआती पैकेज मिला था। इसके बाद लगा कि ऑफर लेटर तो बिल्कुल नहीं मिलेगा लेकिन कंपनी ने न सिर्फ जॉब का ऑफर लेटर दिया बल्कि कहा कि आप अपना लक्ष्य यूपीएससी को ही रखना। राजनंदिनी का कहना है कि मेरे पिता स्कूली शिक्षा विभाग में हेड मास्टर है। उनका हमेशा से सपना था कि बेटी आइएएस ऑफिसर बनकर देश की सेवा करे। पहले मैं बीए करना का मूड बना रही थी, लेकिन एआइइइइ में अच्छी रैंक मिली तो मैनिट ज्वाइन कर लिया। मैनिट में पढ़ाई करने के साथ ही आइएएस की प्रिपरेशन भी शुरू कर दी थी। रोज पांच से छह घंटे अलग से पढ़ाई करती थी।
इंटरव्यू में पांच लाख पैकेज का जॉब छोड़ा, सेकंड अटैम्ट में बनीं डिप्टी कलेक्टर
प्री में नहीं हो पाया था सलेक्शन
राजनंदिनी का कहना है कि पहली बार जब एमपीपीएससी दिया तो प्री में महज एक नंबर से सलेक्शन से चूक गई थी। यहां तक पहुंचने के लिए प्रतिदिन 16 से 18 घंटे तक तैयारी की। दो साल से सोशल मीडिया का बिल्कुल यूज नहीं कर रही हूं। यूपीएससी के हिसाब से तैयारी करती रही। मेरा अगला टारगेट आइएएस ऑफिसर बनना ही है। मैंं डिप्टी कलेक्टर की पोस्ट ज्वॉइन कर साथ ही तैयारी करती रहंूगी।