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भाड़े के शूटर्स को दी थी सुपारी, ऐसे खुला शहला के कत्ल का राज

हत्या व हत्या का षड्यंत्र रचने के लिए जाहिदा परवेज, सबा फारूखी, शाकिब अली उर्फ डेंजर और ताबिश खान को आजीवन कारावास दिया गया। वहीं कोर्ट ने सरकारी गवाह बने इरफान अली को धारा 308 के तहत क्षमादान दिया है। 

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rishi upadhyay

Jul 08, 2017

shahela masood murder case

shahela masood murder case

भोपाल। इसी साल 28 जनवरी को जाहिदा परवेज और सबा फारुकी को सीबीआई कोर्ट ने हत्याकांड का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में जाहिदा और सबा ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की। हफ्ते भर पहले कोर्ट ने बहस के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था। गुरूवार को आदेश जारी करने के बाद शुक्रवार को दोनों को जमानत दे दी गई।


आरटीआई एक्टिविस्ट शहला मसूद हत्याकाण्ड की मास्टरमाइंड इंटीरियर डिजायनर जाहिदा परवेज मुख्य रूप से जबलपुर की रहने वाली है। उसकी शादी भोपाल के एक सभ्रांत परिवार में हुई थी। छह साल पहले अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही जाहिदा के खिलाफ तमाम सबूत उजागर होते रहे। सीबीआई कोर्ट में मामला चलता रहा, लेकिन उसे गवाहों और सुबूतों के आधार पर यकीन था कि वह बरी हो जाएगी।





shehla masood murder case




हत्या के साढ़े पांच साल बाद
16 अगस्त 2011 को हुई आरटीआई कार्यकर्ता शहला मसूद की हत्या के साढ़े पांच साल बाद शनिवार को विशेष न्यायाधीश बीके पालोदा ने फैसला सुनाया था। हत्या व हत्या का षड्यंत्र रचने के लिए जाहिदा परवेज, सबा फारूखी, शाकिब अली उर्फ डेंजर और ताबिश खान को आजीवन कारावास दिया गया। वहीं कोर्ट ने सरकारी गवाह बने इरफान अली को धारा 308 के तहत क्षमादान दिया है।



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(जाहिदा परवेज)



कोर्ट ने कुछ मुख्य बिंदुओं को आधार मानते हुए शहला मसूद हत्याकांड के आरोपियों को सजा सुनाई थी। सीबीआई ने जाहिदा परवेज, सबा फारुकी, सुपारी किलर शाकिब डेंजर, ताबिश और इरफान को आरोपी बनाया था। इनमें से इरफान इस केस का सरकारी गवाह बन गया था जिसे कोर्ट ने क्षमादान देकर बरी कर दिया था, जबकि बाकि सभी को अर्थदंड समेत उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आइए जानते हैं कि इस फैसले के प्रमुख बिन्दु कौन कौन से थे...


1 - पैरा 42 : गवाह बबलू उर्फ शाहिद ने बयान दिया है कि इरफान कानपुर में उसके मोहल्ले में ही रहता है। 4 अगस्त 2011 को इरफान भोपाल आया था और उसने बताया कि शाकिब ने उसे बुलाया है। इरफान 3-4 दिन भोपाल में रहा और चला गया। इरफान कई बार शाकिब व ताबिश के साथ काले रंग की पल्सर व एक्टिवा पर घूमते हुए देखा गया था। घटना दिनांक 16 अगस्त 2011 को वह सुबह से गायब हो गया, 4 बजे आया और सामान लेकर चला गया।


2 - पैरा 42 : इरफान ने कहा, हत्या के बाद ताबिश को चक्की वाली जगह पर छोड़ दिया गया था। शाकिब उसे कार में बैठाकर घर ले गया। कट्टा और अन्य कारतूस शाकिब के पास थे, तब इरफान ने पूछा था कि कट्टा पुलिस पकड़ लेगी तो कत्ल का इल्जाम लग जाएगा। तब शाकिब ने उससे बोला था कि पकड़े ही नहीं जाएंगे। कट्टे का बोर बदल देंगे तो पता ही नहीं चलेगा। उसे जानकारी थी कि बेरल बदल दिया जाएगा तो बेलेस्टिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट नहीं आएगी।



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(साकिब डेंजर)


3 - पैरा 47 : जाहिदा के कथन से सपष्ट है कि उसके विवाहेत्तर संबंध थे। जिससे उसके विवाहेत्तर संबंध थे, उसी से शहला और अन्य महिलाओं से संबंध होने के कारण वो चिंतित थी, और जिससे संबंध थे, उसका पीछा भी करवाती थी, आपत्ति भी करती थी, इसके बावजूद दोनों सप्ताह में एक बार या दो बार मिलते थे।


4 - पैरा 54 : इस पैरे में कोर्ट ने साफ किया है कि यह सपष्ट है कि विवाहेत्तर संबंध और शारीरिक हवस जाहिदा में पागलपन की हद तक थी और ऐसे व्यक्ति कुछ भी कर सकते हैं, इसलिए इस अपराध में जाहिदा का मकसद इस साक्ष्य से प्रकट होता है। वह हत्या के षड्यंत्र में शामिल रही है।


5 - पैरा 60 : जाहिदा की डायरी में दिनांक 3 फरवरी 2010 को हिंग्लीश में लिखा है कि मुझे ये चीज मारे डाल रही है की उसके शहला, माहिरा सभी से अब तक रिलेशन है। 19 फरवरी 2010 को भी हिंग्लीश में लिखा वो बहुत सारी जगह जाते हैं, फिजिकली रिलेटेड वीथ सो मेनी अदर वुमन बट आई कांट हेल्प इट। 12 अप्रैल 2010 और 13 अप्रैल 2010 को लिखा आई हेट यू ध्रुव. दिल ही दिल में कुछ नफरत सी हो गई है...


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6 - पैरा 63 : जाहिदा ने बताया कि 28 जुलाई 2011 को उनके प्रायवेट नंबर से जाहिदा ने अपने डोकोमो नंबर जिसका शुरू का नंबर 810 और लास्ट 706 है, पर फोन आया, वो समझाइश देने लगे। कहा कि मैं तुमसे ही प्यार करता हूं, वह मुझे बार-बार फोन कर बुलाती है। एक तरफ तुम हो, दूसरी तरफ शहला और तीसरी तरफ मेरी बीवी। यही कारण है कि जाहिदा ने शहला को अपने रास्ते से हटाने का मन बनाया।


7 - पैरा 66 : जाहिदा की डायरी में तथ्य लिखे हैं, उनका यहां उल्लेख करना सुसंगत प्रतीत होता है। 16 अगस्त 2011, उसे उसके घर के सामने गोली मार दी गई। अली ने 11.15 बजे फोन लगाया - मुबारक हो साहब, हमने उसके घर के सामने ही कर दिया। मैं काफी आरामदायक महसूस कर रही थी। मस्जिद गई और नमाज अदा की। हमने शाम में रबाब का जन्मदिन मनाया। लेकिन हम दोनों ही डर रहे थे।


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8 - पैरा 71 : न्यायालय के समक्ष यह अहम प्रश्र है कि आरोपी इरफान ने अपने कथन में बजाज डिसक्वर वाहन का उपयोग होना नहीं बताया है। तो इसका रंग बदलवा कर जाहिदा के घर से हटाकर आरोपिया सबा फारूखी ने उसे लावारिस में क्यों छोड़ा? सीबीआई वकील ने कहा, यदि इस वाहन का उपयोग नहीं किया जाता तो उसका रंग क्यों बदला जाता। दूसरे को फंसाने के लिए ऐसा करवाया हो।


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(जाहिदा परवेज, फैसला आने के बाद)



9 - पैरा 71 : आरोपी इरफान भी ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है। उसने मोटर साइकल बजाज पल्सर का नाम ज्यादा लिया है। लेकिन धारा 164 के तहत दिए गए कथन में उसने केवल मोटर साइकिल से ही अपराध में आना जाना और उपयोग करना बताया है और इस साक्ष्य को बिगाडऩे और आच्छादित करने का आरोप आरोपिया सबा फारूखी के विरूद्ध इन परिस्थितियों में साबित होता है। यदि यह मोटर साइकल उपयोग नहीं की जाती तो उसका रंग बदलवाकर लावारिस में नहीं छोड़ा जाता।


10 - पैरा 101 : घटना के दिन इरफान मोबाइल नंबर 9301237851 का इस्तेमाल कर रहा था। ये उसे आरोपी शाकिब ने दिया था। घटना दिनांक को 10.11 बजकर 11.19 मिनट तक यह मोबाइल घटना स्थल पर मौजूद पाया गया। उसकी उपस्थिति के दौरान इस मोबाइल से पैटर्न पर ये मोबाइल कॉल करता रहा, जो नंबर 367 पर 10.22 मिनट से लेकर 11.19 मिनट तक 57 बार कॉल करता रहा। यही नंबर 9300068003 साकिब के फोन पर कई बार बात करता पाया गया।