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अब सांख्य सागर का अंतरराष्ट्रीय महत्व, झील को रामसर साइट का दर्जा मिला

मुख्‍यमंत्री ने दी बधाई, भोपाल के भोज ताल के बाद मध्यप्रदेश की दूसरी झील  

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मध्यप्रदेश की दूसरी झील

भोपाल। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की सांख्य सागर झील अब अंतरराष्ट्रीय महत्व की बन गई है. इस झील को रामसर साइट का दर्जा मिला है। इसके पहले भोपाल के भोज ताल यानि बड़ा तालाब को यह दर्जा मिल चुका है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि अब इसे वैश्विक पर्यटन मानचित्र में जगह मिलेगी। झील को मिला यह दर्जा प्रदेश में जैव विविधता व पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का पारितोषिक है। सरकार व राज्य के प्रकृति प्रेमी नागरिकों द्वारा जैव विविधता व पर्यावरण संरक्षण को इससे बढ़ावा मिलेगा।

क्या है रामसर साइट
झील संरक्षण के संबंध में ईरान के रामसर नगर में वर्ष 1971 में एक अंतरराष्ट्रीय संधि हुई . इसमें कुछ मानदंडों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड साइट की सूची संधारित की जाती है।

इस संबंध में राज्य के पर्यावरण मंत्री हरदीप सिंह डंग ने बताया कि केंद्र सरकार ने शिवपुरी के सांख्य सागर सिरपुर तालाब व यशवंत सागर को रामसर साइट में शामिल करने पर सहमति दी थी. स्विटजरलैंड के ग्रैंड शहर स्थित रामसर सचिवालय को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था। कुछ अतिरिक्त जानकारी मांगी थी जिसे केंद्र सरकार के माध्यम से उपलब्ध करा दी गई थी। अब सांख्य सागर झील को रामसर साइट का दर्जा मिल गया है। अन्य प्रस्ताव को भी शीघ्र ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

रामसर संधि के तहत केन्द्रीय वन पर्यावरण और जलवायु मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वेटलेण्ड को रामसर साइट के रूप में तमिलनाडु मध्यप्रदेश और मिजोरम की 5 वेटलेण्ड को चिन्हित किया गया है। अब देश में रामसर साइट की संख्या 49 से बढ़कर 54 पर पहुंच गई है। रामसर साइट्स वैटलैंड्स है जिनका अपना अंतरराष्ट्रीय महत्व है। किसी झील के रामसर साइट्स घोषित होने पर उसके संरक्षण को बढ़ावा दिया जाता है। रामसर ईरान में स्थित वह स्थान है जहां 1971 में अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।