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इंद्र इंद्राणियों सहित विधान के प्रमुख पात्रों ने भक्ति भाव से समर्पित किए अर्घ्य

- अशोका गार्डन, शंकराचार्य नगर जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान

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इंद्र इंद्राणियों सहित विधान के प्रमुख पात्रों ने भक्ति भाव से समर्पित किए अर्घ्य

इंद्र इंद्राणियों सहित विधान के प्रमुख पात्रों ने भक्ति भाव से समर्पित किए अर्घ्य

भोपाल। अशोका गार्डन जैन मंदिर, शंकराचार्य नगर जैन मंदिर में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में इन दिनों श्रद्धालु सिद्ध भगवान की आराधना कर रहे हैं। विधान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धर्मलाभ ले रहे हैं। विधान के अंतर्गत भगवान की शांतिधारा, अभिषेक के साथ इंद्र इंद्राणी सहित विधान के प्रमुख पात्रों द्वारा संगीतमय स्वरलहरियों के साथ पूजा अर्चना कर विधान के अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं।

पंच धारणाओं से होती है मन पर विजय: आचार्य आर्जव सागर
अशोका गार्डन जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान में गुरुवार को इंद्र इंद्राणियों द्वारा 32 अर्घ्य समर्पित किए। इस मौके पर आयोजित प्रवचन में आचार्य आर्जव सागर महाराज ने संदेश दिया कि हर मानव को ध्यान, धारणा और योग के माध्यम को जरुर अपनाना चाहिए, जिससे जीवन आध्यात्मिक ऊंचाई को छू लेता है। उन्होंने कहा कि मन पर विजय प्राप्त करने के लिए योगी लोग पंच धारणाओं का आलम्बन लेते हैं, जिस कारण उनका मन अपनी आत्मा के ध्यान में लीन होकर समता को प्राप्त होता है । इसी का नाम शुद्धोपयोग है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

सिद्ध भगवान की भक्ति से आत्मा में शुद्धि आती है: मुनि पुराण सागर
शंकराचार्य नगर पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास की साधना के साथ 1008 सिद्धचक्र मंडल विधान चल रहा है। गुरुवार को इंद्रों द्वारा जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक, शांतिधारा की गई। मूलनायक भगवान पारसनाथ की पूजा के बाद सिद्धचक्र मंडल विधान के चौंसठ रिद्धि सिद्धि अष्ट द्रव्य के साथ इंद्र इंद्राणियों ने भक्तिनृत्य करते हुए अर्घ्य समर्पित किए। इस मौके पर मुनि पुराण सागर महाराज ने कहा अष्टानिका पर्व में जो विधान लिए मंडलरू बनाया जाता है, वह अनेक प्रकार के मंत्रों से युक्त होता है। अष्टांनिका पर्व में जो भक्त भगवान की भक्ति,जाप, स्वाध्याय, पूजा, अभिषेक करता है उसे सम्यकत्व ज्ञान की प्राप्ति होती है। जीवन में भावना से ही कामना पूरी होती है। विधान करने से जो भी भावना प्रभु से करते हैं उनकी कामना पूर्ण होती है। इस मौके पर चातुर्मास समिति द्वारा सांगानेर से आए ब्रह्मचारी भैया संजय शास्त्री का सम्मान किया गया।

बच्चों को संस्कारित करने पर जोर दिया
शाहपुरा स्थित पाŸवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया गया। गुरुवार को चौसठ रिद्धि के 64 अघ्र्य समर्पित किए गए। इस मौके पर आयोजित प्रवचन में मुनि शैल सागर महाराज ने बच्चों को संवारने के लिए संस्कारित करने पर जोर दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल, कोचिंग एवं बस में आने जाने में कुल मिलाकर 10 घंटे लगते है, इसके बाबजूद पढ़ाई पूर्ण नहीं हो पाती है। इस प्रकार से बच्चों पर अधिक भार होने से न तो वह सामाजिक, धार्मिक और न ही वह घर, मॉ बाप के रह जाते हैं। उन्हें व्यवहारिक एवं धार्मिक ज्ञान देना जरूरी है तभी उनका जीवन सफ ल होगा। इसके लिए मंदिरों या सामाजिक पाठशालाएं खोलकर बच्चो को भेजे जिससे बच्चे ज्ञानवान बने एवं अच्छी समाज का निर्माण कर सके।