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17 मार्च तक चलेगी सिल्क इंडिया एग्जीबिशन, यहाँ मिलेगा सिल्क साडिय़ों का स्प्रिंग समर कलेक्शन

बिट्टन मार्केट स्थित रविशंकर कम्युनिटी हॉल में 'सिल्क इंडिया' एग्जीबिशन का शुभारम्भ

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भोपाल

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Vikas Verma

Mar 12, 2020

Silk India exhibition begins at Ravishankar Community Hall Bhopal

Silk India exhibition begins at Ravishankar Community Hall Bhopal

भोपाल। ऋतुराज वसंत चारों और अपनी छठा बिखेर रहा है, राग रंग के उत्सव होली के बाद रंगपंचमी और जल्दी ही चैत्र नवरात्री, गुड़ी पड़वा रामनवमी आदि त्योहरों आने को हैं। मार्च, अप्रैल, मई के वैवाहिक मुहूर्तों के लिए सीजन की खरीदारी जारी है। ऐसे में विवाह समारोहों, पारिवारिक आयोजनों आदि विविध कार्यक्रमों के लिए अनुकूल सिल्क साडिय़ों की व्यापक श्रृंखला एक ही स्थान पर उपलब्ध करवाने के लिए रविशंकर कम्युनिटी हाल, बिट्टन मार्केट भोपाल में आयोजित की जा रही सिल्क इंडिया प्रदर्शनी व सेल खरीददारी का शानदार अवसर है।

कतान सिल्क पर तैयार की पार्टी वियर साड़ी में उपयोग हुई 35 ग्राम चांदी

रविशंकर कम्युनिटी हॉल, बिट्टन मार्केट में इन दिनों सिल्क इंडिया एग्जीबिशन का आयोजन किया जा रहा है। एग्जीबिशन में न सिर्फ दुल्हनों के लहंगे की वैरायटी बल्कि ऑफिस गोइंग महिलाओं और गल्र्स के लिए साड़ी और सूट की डिफरेंट वैरयटीज प्रदर्शित की गई है। यहां सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र है कांजीवरम की गोल्ड जरी सिल्क साड़ी। लगभग पांच लाख रूपए कीमत की इस साड़ी में जरी वर्क में30 से 40 ग्राम गोल्ड का उपयोग किया गया है। गोल्ड जरी को बनाने के लिए पहले सिल्क थ्रेड पर सिल्वर कोटिंग की गई उसके बाद गोल्ड की कोटिंग कर इसे फाइनल टच दिया गया। खास बात यह है कि इस साड़ी में इतना ज्यादा बारीक काम होता है कि इसे तैयार करने में पांच महीनें का समय लगता है। यह एग्जीबिशन 17 मार्च 2020 तक दोपहर 1 बजे रात 9 बजे तक विजिट की जा सकती है।

ऑर्गेंजा सिल्क साडिय़ां खास

ऑर्गेंजा सिल्क से बुनी गई साडिय़ां नरम और पतली होती हैं। रेशम और इसी तरह की अन्य सामग्रियों के विपरीत, ऑर्गेंजा साडिय़ाँ चमक-रहित होती हैं और सुंदर मैट फिनिश होती हैं। सॉफ्ट और पतले होने के बावजूद, ऑर्गेंजा वास्तव में मज़बूत साड़ी होती है, पतली होने से यह साड़ी पहनने वाले को बहुत हल्की महसूस होती है। अन्य साडिय़ों की तरह किसी भी क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की ऑर्गेंजा साड़ी उस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, बनारसी ऑर्गेंजा साड़ी में आमतौर पर एक डिजाइनर पल्लू और बनारसी बॉर्डर के साथ पटोला पत्ती के डिजाइन होते हैं। माहेश्वरी ऑर्गेंजा सिल्क में जीवंत रंगों के साथ फैंसी प्रिंट, नियोन या डार्क बॉर्डर और आकर्षक डिजाइनर पल्लू होते हैं। डिज़ाइनर सव्यसाची के हाल ही में लांच किये गए ऑर्गेंजा कलेक्शन के बाद इन साडिय़ों की डिमांड बढ़ी है।

बीहू नृत्य में उपयोग होता है मेखला

असम से आए बुनकर विपुल शाह ने बताया कि इस बार खास तौर पर मेखला चादर निर्माण में उपयोग किए जाने वाले मूगा सिल्क पर तैयार थ्री पीस साड़ी लेकर आए है। खास बात यह है कि असम के लोग इस साड़ी का उपयोग ज्यादातर बीहू नृत्य के समय करते है। पूरी तरह से हेंडमेड ढंग से तैयार की गई यह साड़ी को कम्पलीट होने में 25 दिन का समय लगता है। इस साड़ी की कीमत 12 हजार रूपए है।

35 ग्राम चांदी का होता है उपयोग

बनारस से आए बुनकर मो. एजाज ने बताया कि बनारस में खासतौर पर तैयार की गई कतान सिल्क साड़ी वहां के लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होती है। यह मूलत: पार्टी वियर साड़ी है जिसे वहां की महिलाएं बहुत ज्यादा पसंद करती है। इस साड़ी में 35 ग्राम चांदी का उपयोग कोटिंग के रूप में किया जाता है। 80 हजार रूपए कीमत वाली इस साड़ी में उपयोग किया जाने वाला रेशम असम से मंगाया जाता है।

एग्जीबिशन में यह भी है खास

पैठनी महाराष्ट्र की पारंपरिक हैंडलूम साड़ी है। इस साड़ी की वीविंग महाराष्ट्र के ऐवला गांव में होती है। इस साड़ी को बनाने में 1 से 2 महीने का समय लगता है। अधिकतर पैठनी साड़ी महाराष्ट्र में दुल्हन के लिए बनाई जाती है। इस साड़ी में 4 कोटिंग की सिल्वर गोल्ड जरी का उपयोग होता है। यह साड़ी मलबरी सिल्क के ऊपर बुनी जाती है । पैठनी डिजाइन में अधिकतर पीकॉक के डिजाइंस बनाये जाते हैं। साड़ी की कीमत 15 हजार से शुरू होकर 1 लाख तक रहती है।