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यदि करते हैं गौ माता से प्यार तो कभी न खाएं ये मिठाईयां

मिलावट के इस जमाने में कुछ भी शुद्ध नहीं होता है। उसमें भी चांदी और सोने जैसी धातुओं में मिलावट तो आम बात है।चांदी के वर्क की शुद्धता उसके उत्पादन पर निर्भर होती है।

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Pankaj Shrivastav

Jul 21, 2017

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भोपाल। चांदी के बर्तन में खाना सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है। कहते हैं चांदी ऐसा तत्व है जो शरीर में शीतलता बनाएं रखता है साथ ही हमारे शरीर के विकारों को दूर करने में भी मदद करता है। आयुर्वेद में तो चांदी से दवाएं तैयार करने का भी तरीका बताया गया है। लेकिन मार्केट में मिलने वाली चांदी की मिठाईयां मुंह के टेस्ट के लिए भले ही बेहतर हों लेकिन सेहत के लिए खतरनाक हो सकती हैं। फूड एक्सपर्ट एंड सैफ जॉन मैथ्यू से जानिए चांदी के वर्क का सेहत पर प्रभाव...

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सुरक्षित नहीं चांदी
चांदी के वर्क की शुद्धता उसके उत्पादन पर निर्भर होती है। कई उत्पादक चांदी की जगह एल्यूमीनियम का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा इसे तैयार करते वक्त साफ-सफाई का भी ध्यान बिलकुल नहीं रखा जाता। ऐसी स्थिति में अगर आप नकली चांदी से सजी मिठाइयां खाते हैं तो वे आपके लिए कितनी सेहतमंद होंगी, यह आप खुद ही समझ सकते हैं।

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मांसाहारी है चांदी
कई भारतीय विश्विद्यालयों में चांदी के वर्क पर रिसर्च हो चुकी है। जिनकी रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो चांदी मांसाहारी है और यह बच्चों के दिमाग पर बहुत बुरा असर डालती है। रिपोट्र्स के मुताबिक, चांदी के वर्क बनाने के लिए हर वर्ष तकरीबन 125000 गायों की हत्या की जाती है। और उसके पेट से आंत निकालकर उसके अंदर चमकीली चांदी जैसी धातु का टुकड़ा परत-दर-परत लपेट कर रखा जाता है, ताकि उसका खोल बन जाए। उसके बाद लकड़ी के हथौड़े से जोर-जोर से पीटा जाता है, जिससे आंत फैल जाती है और आंत के साथ धातु का टुकड़ा वर्क के रूप में पतला हो जाता है।

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हो सकती हैं ये बीमारियां
लखनऊ के इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ टाक्सकोलॉजी रिसर्च के अनुसार बाजार में उपलब्ध चांदी के वर्क में निकेल, लेड, क्रोमियम और कैडमियम बहुतायत मात्रा में पाया जाता है। इसको खाने से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। यह लिवर, किडनी और गले को बुरी तरह डैमेज कर देता है। फूड रेगुलेटरी ऑथोरिटी के अनुसार, चांदी के वर्क में 99.9 प्रतिशत चांदी होनी चाहिए। लेकिन बाजार में मिलने वाली मिठाईयों में चांदी की मात्रा न के बराबर है।

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30 टन चांदी की खपत
गौरतलब है कि भारत में एक किलो चांदी का वर्क बनाने के लिए लगभग 12500 गायों की आंतों की ज़रूरत होती है। साथ ही एक अनुमान के मुताबिक, देश में सालाना लगभग 30 टन चांदी के वर्क की खपत होती है। इसे बनाने का काम मुख्य रूप से कानपुर, जयपुर, अहमदाबाद, सूरत, इंदौर, रतलाम, पटना, भागलपुर, वाराणसी, गया, मुम्बई आदि में होता है।