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Sindoor: मांग में कौन सा सिंदूर लगाना चाहिए, लाल या नारंगी ?

हिंदू धर्म में सिंदूर का बेहद महत्व होता है. खासकर सुहागिन महिलाओं के लिए सिंदूर बेहद खास होता है......

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भोपाल। हिंदू धर्म में सिंदूर महिलाओं के बेहद पवित्र होता है. खासकर विवाहित महिलाओं के लिए क्योंकि सिंदूर सुहाग का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में शादी तभी संपन्न होती है जब दूल्हा दुल्हन की मांग में सिंदूर लगाता है। 'सिंदूर' शब्द सुनते ही सबसे पहले दो दृश्य आंखों के सामने उपस्थित होने लगते हैं, एक स्त्री की मांग और दूसरा लाल या पीला रंग। यह लाल रंग एक स्त्री की खुशियां, ताकत, स्वास्थ्य, सुंदरता आदि से सीधे जुड़ा है। हजारों-हजार वर्षों से यह रंग विवाहित स्त्री की पहचान और उसके सामाजिक रुतबे का पर्याय बना हुआ है।

हिन्दू शादियों में सिंदूर की रस्म बेहद खास होती है और शादी के दिन के बाद से महिलाएं रोज अपने पति की दीर्घायु की कामना में मांग में सिंदूर भरती हैं। लेकिन सिंदूर लगाते समय कुछ बातों का जरूरी होता है। जानिए कौन सी हैं वे बातें....

- कभी भी मंगलवार के दिन सिंदूर नहीं लगाना चाहिए। हनुमान जी ने अपने शरीर में माता सीता का सिंदूर लगा लिया था तभी से मंगलवार के दिन महिलाओं को सिंदूर लगाने की मनाही है। हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी माना जाता है इसलिए जिस दिन उन्हें सिंदूर चढ़ाया जाता है उस दिन महिलाओं को सिंदूर नहीं लगाना चाहिए।

- कभी भी अपनी सिंदूरदानी को किसी और महिला के साथ शेयर न करें। ऐसा करने से पति के जीवन में दुर्भाग्य आ सकता है।

- सिंदूर को हिंदू धर्म शास्त्र में बहुत ही पवित्र माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि इसे कभी भी नहाए बिना मांग में नहीं लगाना चाहिए।

- कभी भी गीले बालों में सिंदूर न लगाएं।

- 'सिंदूर' 2 तरह का होता है, लाल व पीला। माता सती और पार्वती की शक्ति और ऊर्जा, लाल रंग से जानी जाती है इसलिए महिलाएं ज्यादातर इसी रंग का सिंदूर लगाना पसंद करती हैं। हालांकि स्पेशल त्यौहारों में पीला सिंदूर लगाना चाहिए। छठ पूजा के लिए भी पीले रंग के सिंदूर का ही यूज किया जाता है क्योंकि ये उल्लास का प्रतीक होता है।