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इंदौर: डस्टबिन हटाकर स्वच्छता में नंबर वन बना भोपाल: स्मार्ट बिन के नाम पर हर जगह कचरा घर

बड़ा सवाल: राजधानी में 13.50 करोड़ की लागत वाली स्मार्ट बिन योजना फेल, नगर निगम अब पीछा छुड़ा रहा

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Smart bin

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भोपाल. देश के नंबर वन स्वच्छ शहर इंदौर में गली-मोहल्लों एवं सड़कों के किनारे से डस्टबिन हट चुके हैं। इसके उलट राजधानी में स्मार्ट बिन के नाम पर लोगों को कचरा फेंकने की नई जगह मुहैया करा दी गई। अब राजधानी में 13.50 करोड़ की लागत वाली स्मार्ट बिन योजना फेल साबित हो रही है। साल की शुरुआत में डेढ़ सौ जगह लगाए अंडरग्राउंड स्मार्ट बिन स्वच्छता की बजाय गंदगी बढ़ा रहे हैं। नगर निगम ने भी इन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया है। टूट-फूट चुके स्मार्ट बिन के कारण कचरा जमा हो रहा है।

शहर में जहां देखो वहां अव्यवस्था
बावडिय़ा कलां से कोलार (कलियासोत) की ओर मास्टर प्लान सड़क किनारे लगाए स्मार्ट बिन के आसपास कचरा फैला रहता है। जहांगीराबाद स्थित पुलिस आईटीआई के सामने, शाहपुरा तालाब से गुलमोहर की ओर तिराहे पर, पंजाबी बाग, प्रभात चौराहे के पास, अप्सरा टॉकीज के सामने स्मार्ट बिन टूट चुके हैं और कचरे के ढेर लगे हैं। ईश्वर नगर में तो ये पूरी तरह जर्जर हो गए हैं। इनके ढक्कन गायब हैं तो कुछ के हैंडल टूट चुके हैं।

निजी कंपनी को लाभ दिलाने का आरोप
तत्कालीन अपर आयुक्त एमपी सिंह व स्मार्ट सिटी के तत्कालीन सीईओ संजय कुमार इस प्रोजेक्ट को अमल में लाए थे। एक निजी फर्म को स्मार्ट सिटी के माध्यम से अनुबंधित किया गया और 13.50 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि दी गई।

दावों की हकीकत जमीन पर दिख रही है
1 स्मार्ट बिन में कचरा भरते ही कंट्रोल रूप पर जानकारी आएगी।
हकीकत: इन स्मार्ट बिन को कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है, लेकिन सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
2 कचरा निकालने के बाद स्मार्ट बिन को पानी से साफ करेंगे।
हकीकत: स्मार्ट बिन को उठाने के लिए वाहन तय हैं, लेकिन इनकी पानी से धुलाई नहीं होती।
3 सेंसर और पेडल से ढक्कन खोलने की व्यवस्था होगी।
हकीकत: ऑटोमेटिक सेंसर झूठ साबित हुए। इसी तरह घटिया पेडल होने के कारण टूट गए।
4 स्मार्ट बिन रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन तकनीक वाले हैं।
हकीकत: ये दावे कागजी और हवा-हवाई ही रहे। ऐसा कुछ नहीं हो पाया। पूरा सिस्टम खराब है।
5 एक चैंबर में दो डस्टबिन लगाए हैं। एक में गीला, दूसरे में सूखा कचरा एकत्र करना था।
हकीकत: दो डस्टबिन तो लगाए गए हैं, लेकिन मौके पर सेग्रिगेशन नहीं हो रहा है।

सफाई व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने के लिए शहर प्रतिबद्ध है। कचरा संग्रहण के लिए अमल में लाए गए स्मार्ट बिन प्रोजेक्ट का रिव्यू किया जाएगा।
आलोक शर्मा, महापौर