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स्मार्ट घोटाला: 54 स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम के नाम पर फर्जीवाड़ा, दोगुने से ज्यादा दाम में की खरीददारी

- डिंडौरी के 54 स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम के लिए फर्जीवाड़ा... बाजार से दोगुने दामों पर की साजो-समान की खरीदी- भ्रष्टाचार की पोल खुलते ही मुख्य आरोपी सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला इलाज के नाम पर गए छुट्टी में- संतोष शुक्ला के अकूत संपत्ति का मामला लोकायुक्त में पहले से चल रहा- अब तत्कालीन और मौजूदा कलेक्टर के पाले में डाल रहे भ्रष्टाचार की गेंद

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भोपाल@रूपेश मिश्रा
सूबे के जनजातीय कार्य विभाग में स्मार्ट शिक्षा के नाम पर खुली लूट मची है। अंधेरगर्दी का आलम ये है कि भ्रष्टाचारी बगैर किसी खौफ के बच्चों के नाम पर करोड़ों का काला खेल कर रहे हैं। पत्रिका टीम की पड़ताल में सवा तीन करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। ये खुलासा सिर्फ एक जिले का है अगर बाकी जिलों में भी स्मार्ट क्लासरूम के लिए की गई खरीददारी की जांच की जाए तो आंकड़ा और बड़ा हो सकता है। दरअसल, डिंडौरी जिले के 54 हायर सेकण्डरी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाने के लिए साजो-सामान की खरीदी बाजार दाम से दोगुने से भी ज्यादा में की गई। विभाग की टेंडर शर्तों के मुताबिक जो सामान एक से सवा करोड़ रुपए में खरीदा जा सकता था, उसका सौदा जनजातीय कार्य विभाग ने 3 करोड़ 18 लाख 54 हजार 600 में किया। इतने बड़े घोटाले पर राजधानी में बैठे आला अफसर चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि उनकी जानकारी में ये मामला पहले से है। पत्रिका ने इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने के लिए प्रदेश के तीन बड़े महानगर इंदौर, भोपाल और जबलपुर से टेंडर में लिखी शर्तों पर ही उपकरणों व सामान का कोटेशन तैयार करवाया। इसमें किसी भी शहर ने सवा करोड़ से ज्यादा का कोटेशन नहीं भेजा लेकिन विभाग में इसी समान की खरीदी सवा तीन करोड़ से ज्यादा पर हुई है।


भ्रष्टाचारियों ने इस मनमर्जी दाम से की खरीददारी

सामान का नाम---सामान की संख्या------एक पीस का दाम---कुल दाम

इंटैरक्टिव टच पैनल---54पीस---4,96000----26,784,000

यूपीएस---54पीस---42000---2,268,000

कैमरा---54पीस---37000---1,998,000

स्पीकर----54पीस---14900---804,600

कुल भ्रष्टाचारी दाम--- 31854600

पोल खोलने के लिए पत्रिका ने तीन महानगरों से तैयार करवाए कोटेशन

जबलपुर

सामान का नाम---सामान की संख्या------एक पीस का दाम---कुल दाम


इंटैरक्टिव टच पैनल---54पीस---2,30,000---12,420,000

यूपीएस---54पीस---32,900---1,776,600

कैमरा---54पीस---9900---534,600

स्पीकर---54पीस---2200---118,800

टोटल---14,850,000
(कोटेशन में 18 प्रतिशत जीएसटी शामिल है)


इंदौर
सामान का नाम---सामान की संख्या------एक पीस का दाम---कुल दाम

इंटैरक्टिव टच पैनल---54पीस---165200---8,920,800

यूपीएस---54पीस------7788---420,552

कैमरा---54पीस---14999---809,946

स्पीकर---54पीस----2271---122,634

टोटल---10,273,932
(कोटेशन में 18 प्रतिशत जीएसटी शामिल है)

भोपाल

सामान का नाम---सामान की संख्या------एक पीस का दाम---कुल दाम

इंटैरक्टिव टच पैनल---54पीस---176500---9,531,000

यूपीएस---54पीस----33900---1,830,600

कैमरा---54पीस----15500---837,000

स्पीकर---54पीस----2700---145,800
टोटल---12,344,400

(कोटेशन में 18 प्रतिशत जीएसटी शामिल है)

खेल कर इलाज के नाम पर छुट्टी लेकर चले गए सहायक आयुक्त
स्मार्ट क्लास में खरीददारी का काला खेल करने वाले जनजातीय विभाग के सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला खेल कर 6 दिसंबर को इलाज के नाम पर छुट्टी पर चले गए। सूत्रों ने बताया उनका भ्रष्टाचार कर ऐसे भागना पुराना पैंतरा रहा है। साल 2018 में भी अकूत संपत्ति को लेकर जब लोकायुक्त ने इनके पांच ठिकानों पर छापा मारा था। और पांच करोड़ रूपए की चल-अचल संपत्ति मिली थी। तब भी संतोष इलाज कराने नागपुर चले थे।


20 करोड़ 88 लाख के भ्रष्टाचार में भी सने हैं हाथ
सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला 20 करोड़ 88 लाख के एक अन्य प्रकरण में भी आरोपी हंै। डिंडौरी जिले की 84 संस्थाओं में इतनी लागत से संतोष शुक्ला ने टेंडर जारी कर संस्थाओं के मरम्मत कार्यों के आदेश ठेकेदारों को तो दिए लेकिन उन संस्थाओं को नहीं दिया जहां मरम्मत कार्य कराया जाना था। यानी पूरे पैसे का ही खेल हुआ, जिसकी जांच की आंच कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच चुकी है।

जिस कंपनी से समान की खऱीदी हुई वहां चल रहा सैलून

पत्रिका ने ग्राउंड जीरो पड़ताल करने के लिए राजधानी भोपाल स्थित कंपनी के उस ठिकाने पर भी दस्तक दी, जहां से समान खरीदी की गई। उस कंपनी के टेंडर के कागजों में अलग और गूगल पर अलग पता दिख रहा था। लिहाजा पत्रिका टीम ने दोनों ही ठिकानों पर पड़ताल की। एक जगह दुकान सील का बोर्ड लगा था और दूसरी जगह सैलून चल रहा था। अब सवाल है कि क्या किसी फर्जी कंपनी से या संतोष शुक्ला ने किसीे रिश्तेदार के नाम से कंपनी बनावाकर खरीदी की। जिस कंपनी से खऱीदी की गई है, उसका सर्वेसर्वा अजय शुक्ला नाम का व्यक्ति है।

तत्कालीन कलेक्टर की भूमिका पर भी प्रश्न चिह्न
डिंडौरी के तत्कालीन कलेक्टर रत्नाकर झा की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। करोड़ों की मनमर्जी से खरीदी की स्वीकृत क्या कलेक्टर ने आंख मूंद कर दी थी। पत्रिका टीम ने रत्नाकर झा का पक्ष जाना तो उन्होंने पूरे मामले से अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने पूरा मामला मौजूदा कलेक्टर विकास मिश्रा पर डाल दिया। जबकि सूत्र बताते हैं कि रत्नाकर झा और संतोष शुक्ला के बीच काफी प्रगाढ़ संबंध हैं।


प्रकरण की जांच करवा रहे
ये मामला मेरे संज्ञान में आया है, जिसकी जांच करवाई जा रही है। मुझे आए अभी चार महीने ही हुए हैं। जो हुआ उसकी जांच होगी ही लेकिन जो सामान आ गया है उसका बच्चों को लाभ मिलने लगे इस पर भी फोकस है।
- विकास मिश्रा, कलेक्टर, डिंडौरी


मामले का मुझे पता नहीं है
अभी तक मेरे संज्ञान में ऐसा मामला नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी जांच डिंडौरी कलेक्टर करेंगे। अगर इस मामले से जुड़े कोई दस्तावेज आपके पास हैं तो आप मुझे ई-मेल करे दें। मैं दिखवाता हूं।
- संजीव सिंह, आयुक्त, जनजाति कार्य विकास

अभी बात करने की स्थित में नहीं हूं
अभी मैं इलाज करवाने चेन्नई आया हूँ. मौजूदा वक्त में बात करने के हालात में नहीं हूं. एक- दो दिन बाद फोन करिए तब बात होगी।
संतोष शुक्ला, सहायक आयुक्त, जनजाति कार्य विभाग