
अशोक गौतम, भोपाल। चेन्नई के इरूला स्नेक केचर्स इंडस्ट्रियल कारर्पोरेशन की तर्ज पर देश का दूसरा स्नेक केचर्स सेंटर भोपाल के वननविहार में बनाने का प्रस्ताव है। इस केद्र में खौफनाक सांपों को पकड़कर उनका जहर निकाल कर बेंचने का काम किया जाएगा।
वनमंत्री उमंग सिंघार ने पिछले दिनों वन अधिकारियों को सर्प विष के व्यवसायिक उपयोग की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे। अफसरों इरूला स्नेक केचर्स इंडस्ट्रियल कार्पोरेशन का दौरा करके यह प्रस्ताव बनाया है।
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वन समितियों के माध्यम से पकड़े जाएंगे सांप-
सांप का जहर निकालने के इस काम में स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाए भी खुलेंगी। सांप पकडऩे का काम वन समितियों को दिया जाएगा। वन समितियों को सांप पकडऩे और उसके काटने से बचाव की ट्रेनिंग भी वन विभाग की टीम देगी।
इन समितियों को एंटी वीनम किट भी दी जाएगी। समिति के सदस्यों को प्रति सांप के हिसाब से भुगतान करने का प्रस्ताव है। समितियां जंगल से सांप पकड़ कर उन्हें वन विहार स्थित केंद्र तक लाने का काम करेगी। सांप पकडऩे की अनुमति प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी द्वारा तय शर्तो के आधार पर दी जाएगी।
किस तरह काम करेगा स्नेक कैचर सेंटर-
वन विहार में स्नेक केचर सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव है। समितियों द्वारा लाए गए सांपों का यहां सबसे पहले डाक्टरों और वैज्ञानिकों द्वारा परीक्षण किया जाएगा। स्वस्थ सर्प को ही केंद्र स्वीकार करेगी। सांप को पकडऩे के बाद उन्हें कैचर सेंटर में एक माह के लिए रखा जाएगा। माह में चार बार ही सांप का जहर निकाला जाएगा। उसके बाद सांप को वापिस उसी स्थान पर वन समिति के माध्यम से छुड़वाया जाएगा जहां से वह लाया गया था।
कैसे निकालेंगे विष
एक सांप से एक माह में सिर्फ चार बार ही जहर निकाला जा सकता है। जहर निकालने के बाद उसे -१० डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाता है। इसके बाद उसका पाउडर बनाया जाता है। सांप पकडऩे के एक माह के अंदर ही उसे प्राकृतिक रहवास में छोडऩा आवश्यक होता है। प्रयोगशाला अप्रैल से जुलाई तक बंद रहती है।
सांपों को मिलेगा प्राकृतिक रहवास-
स्नेक कैचर सेंटर में सांपों को रहने के लिए यहां प्राकृतिक रहवास तैयार किया जाएगा। उनके रहने के लिए अलग-अलग आकार के मटके रखे जाएंगे और मिट्टी के पिट भी बनाए जाएंगे, जिससे वे यहां असहज महसूस न करें। सांपों को मौसम के हिसाब से प्राकृतिक तापमान की व्यवस्था भी की जाएगी। उनके खाने की व्यवस्था के लिए एक अलग टीम बनाई जाएगी।
यह होंगे मांपदंड-
सांप पकडऩे के लिए मांपदंड भी निर्धारित किए जाएंगे। प्रस्तावित मांपदंड के अनुसार एक मीटर से कम लंबाई वाले रसल वाइपर और इंडियन कोबरा नहीं पकड़े जाएंगे। जबकि कॉमन करैत के लिए यह मांप दंड 90 सेंटीमटर तय किया गया है। सॉ स्किल्ड पाईपर सिर्फ 9 से 12 इंच के लम्बाई वाले ही पकड़े जाएंगे।
ये हैं जहर के सबसे बड़े ग्राहक
सांपों के जहर का उपयोग एंटी विनम तैयार करने एवं शोध कार्यों में किया जाता है। इसके इसके सबसे बड़े ग्राहक किंग इंस्टीट्यूट चेन्नई, भारत सीरम मुम्बई और सेंट्रल रिसर्च इंस्टट्यूट शिमला है।
संस्थान स्थापित करने बनाई जाएंगी दो टीम
चेन्नई और भोपाल की जलवायु में अंतर होने के कारण इस पर भी अध्ययन कराया जाएगा किस मौसम में सांपों का जहर निकालना उपयुक्त रहेगा। इसके साथ ही यहां उनके रहवास विकास के लिए किस तरह के उपाय किए जाएं। इसके लिए विशेषज्ञों की एक टीम प्रायोग शाला तैयार करने से लेकर सांपों के जहर निकालने तक के लिए अध्ययन करेंगी और इसकी रिपोर्ट सारकार को सौंपेगी। जबकि दूसरी टीम सांपों के जहर निकालने, उनको पकडऩे तथा लैब स्थापित करने के संबंध में राज्य सरकार तथा भारत सरकार से अनुमतियां लेने का काम करेगी।
वन विहार से डॉक्टर की एक टीम चेन्नई में भेजी गई थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट दे दी है। रिपोर्ट के आधार पर प्रस्ताव वाइल्ड लाइफ के पास भेजा गया है।
- सूर्य प्रकाश तिवारी, डायरेक्टर, वन विहार भोपाल मप्र
Published on:
04 Aug 2019 10:16 am
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