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समुदाय में जाकर सामाजिक मनोचिकित्सा की ज्यादा जरूरत है – डॉ. सरमन सिंह

मानव संग्रहालय में बदलते विश्व में युवा और मानसिक स्वास्थ्य विषय पर कार्यक्रम का आयोजन

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समुदाय में जाकर सामाजिक मनोचिकित्सा की ज्यादा जरूरत है - डॉ. सरमन सिंह

भोपाल। मानव संग्रहालय द्वारा वर्ड ऑफ वर्थ और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के सहयोग से विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के अंतर्गत मंगलवार को 'बदलते विश्व में युवा और मानसिक स्वास्थ्य' विषय पर 'मुकाम' नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सरमन सिंह, निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी(अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ने कहा कि वर्तमान में सामाजिक मनोचिकित्सा की ज्यादा जरूरत है।

डॉक्टरों को अस्पताल से निकलकर समुदाय में जाना होगा। जहां पर व्यक्तियों, परिवारों, समूहों और समुदायों के साथ मिलकर उनकी मानसिक स्वास्थ्य ज़रूरतों का आकलन करके उनका निदान करें। वे मरीजों और उनके परिजनों के लिए शिक्षक, काउंसलर या थेरेपिस्ट के रूप में भी अपनी सेवाएं दे सकते हैं। साथ ही स्कूली पाठ्यक्रम में मनोचिकित्सा के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए।

युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य सबसे जरुरी

मनोचिकित्सक और वर्ड ऑफ वर्थ की अध्यक्ष डॉ. रुमा भट्टाचार्य ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य सबसे जरुरी है। भावनात्मक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के बारे में अधिक ध्यान नहीं दे पाते है। इस रोग में अकेलापन, याददाश्त का कमजोर हो जाना, डर लगना, अवसाद, तनाव, पाचन क्रिया गडबड़ होना, आत्महत्या के विचार आना आदि के लक्षण दिखाई पड़ते है।

इसे ठीक करने का प्रारंभिक इलाज पता लगाने के लिए युवा के साथ आपसी संवाद जरुरी है। इसके लिए रात्रि का भोजन साथ में बैठकर करना चाहिए ताकि बच्चे अपनी बात माता-पिता को अपनी बात बता सकें।

भावनाएं एक्सप्रेस नहीं कर पाते युवा
डॉ. नमिता गौतम ने बदलते विश्व में युवा और मानसिक स्वास्थ्य विषय पर बताया कि आज के युवाओं में तकनीक के विकास के कारण अभिव्यक्ति के बहुत सारे माध्यम उपलब्ध है। इस कारण आपसी संवाद की कमी के कारण युवा अपनी बात परिवार के सदस्यों, मित्रों से ना बांटकर मोबाइल या अन्य माध्यम का उपयोग करते है।

जिससे वे मानसिक रूप से विचलित हो जाते है। जो भावनाए संज्ञान और व्यवहार को प्रभावित करने वाले विभिन्न मानसिक विकारों या मनोरोगों को जन्म देते है। इसके उपचार हेतु मानसिक और शारीरिक तनावों के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारणों को अलग-अलग चिन्हित कर पाने में सक्षम मनोचिकित्सक के पास जाकर इलाज कराना चाहिए।