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सोलर सिटी में होगा 4000 करोड़ का बिजनेस, दो लाख घरों पर लगेगा प्लांट

फेब्रिकेशन वालों को सोलर प्लांट स्थापना में सबसे ज्यादा कमाई फेब्रिकेशन से जुड़े उद्योग को होगी। लोहा, स्टील व एल्युमिनियम से फैब्रिकेशन करने वालों को बड़े काम मिलने की उम्मीद बन रही है।

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भोपाल

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Manish Geete

Feb 17, 2024

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छत पर सूरज की रोशनी से बिजली उत्पादन पर्यावरणीय तौर पर तो लाभ देगा ही आर्थिक तौर पर भी शहर को करीब 4000 करोड़ रुपए का नया व्यवसाय दे जाएगा। भोपाल में रूफ टॉप सोलर ह्रश्वलांट का शुरुआती लक्ष्य 25000 ह्रश्वलांट रखा है जबकि दो साल में 02 लाख छत तक इसे बढ़ाना है। ऐसे में प्रति छत दो लाख रुपए की लागत का अनुमान रखकर प्रोजेक्ट तय किया जा रहा है। 2 लाख ह्रश्वलांट पर कुल 4000 करोड रुपए का कारोबार होगा।

सबसे ज्यादा कमाई

फेब्रिकेशन वालों को सोलर प्लांट स्थापना में सबसे ज्यादा कमाई फेब्रिकेशन से जुड़े उद्योग को होगी। लोहा, स्टील व एल्युमिनियम से फैब्रिकेशन करने वालों को बड़े काम मिलने की उम्मीद बन रही है। पैनल लगना लगभग वैसा ही है जैसे टीन शेड लगाने का काम होता है। फैब्रिकेटेड ढांचे पर ही सोलर पैनल को स्थापित किया जाता है। इसके साथ ही बैटरी, इनवर्टर और केबङ्क्षलग की भी अच्छी खासी मांग बढऩे की संभावना है।

10 किलोवाट के प्लांट की ज्यादा मांग

सरकार भले ही दो से तीन किलोवाट के छोटे ह्रश्वलांट पर फोकस कर रही हो, लेकिन भोपाल में 10 किलोवाट से ज्यादा के ह्रश्वलांट की मांग ज्यादा है। दो से तीन किलो वाट के ह्रश्वलांट में उपभोक्ता को ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा है। मौजूदा बिजली बिल उनका पहले ही सब्सिडी के साथ आ रहा है, ऐसे में बड़े घर या व्यावसायिक परिसर में जहां ज्यादा बिजली खपत है वहां 10 किलोवाट से ज्यादा बड़े पैनल लगवाने वाले ज्यादा है।

भोपाल में 40 से अधिक कंपनियां

इस समय राजधानी में सोलर ह्रश्वलांट स्थापना से जुड़ी 40 से ज्यादा कंपनियां है। इन कंपनियों में से अभी 25 कंपनियां बिजली कंपनी के माध्यम से प्लांट लगाने के लिए तय हुई हैं। बची हुई भी जल्द ही अपने आप को अनुबंधित कर लेंगी।

बिजली कंपनी शहर से जुड़ी

एजेंसी के साथ मिलकर लोगों को अपनी छत पर बिजली उत्पादित करने का अवसर दे रही है। लोग आगे आए और छूट का लाभ लेकर अपने घर, परिसर पर सोलर ह्रश्वलांट स्थापित करवाएं।
- जीएस मिश्रा, एमडी, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

सोलर प्लांट एक तरह से बिजली की जेनरेशन खुद ही करने का साधन है। सरकार भविष्य में बड़े-बड़े ह्रश्वलांट की बजाय छतों व छोटे एरिया को ही बिजली प्रोडक्शन हाउस बनाने की कोशिश में है। इससे पर्यावरण के साथ ही बिजली उत्पादन की दिक्कतों और बार-बार बिजली गुल की दिक्कतों से राहत मिलेगी।
संयम इंदुरख्या, एक्सपर्ट सोलर पेनल