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कहीं गर्भगृह के बाहर चांद की रोशनी में दर्शन देंगे भगवान तो कहीं होगा अलौकिक शृंगार

- शरद पूर्णिमा आज, जगह-जगह मनेगा शरद उत्सव- खुली आसमान के नीचे दूध से खीर बनाकर भगवान को लगाया जाएगा भोग- होगा अमृतमयी खीर का वितरण
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कहीं गर्भगृह के बाहर चांद की रोशनी में दर्शन देंगे भगवान तो कहीं होगा अलौकिक शृंगार

कहीं गर्भगृह के बाहर चांद की रोशनी में दर्शन देंगे भगवान तो कहीं होगा अलौकिक शृंगार

भोपाल
शरद पूर्णिमा का पर्व बुधवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस मौके पर शहर के राधा कृष्ण मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का विशेष शृंगार किया जाएगा। घरों में भी शरद उत्सव के चलते दूध को उबालकर खीर बनाई जाएगी और खीर का भोग भगवान को लगाया जाएगा। घरों और मंदिरों में भजन, कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे।

माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा सभी कलाओं से युक्त होता है। इस दिन रात्रि में आसमान के नीचे लोग दूध उबालते हैं। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की सीधी किरणे जो दूध पर पड़ती है, वह औषधियुक्त होती है और कई बीमारियों से राहत प्रदान करती है। इसलिए इस दिन कई लोग खुले आसमान में दूध उबालते हैं।
भजन कीर्तन के साथ भगवान को लगेगा खीर का भोग
शहर के कई मंदिरों में शरद पूर्णिमा के मौके पर भगवान की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी और शृंगार होगा। इस दौरान भगवान को खीर का भोग लगाया जाएगा। शहर के राधाकृष्ण मंदिरों में भी भजन कीर्तन सहित विशेष आयोजन होंगे। शहर के माता मंदिर, श्रीकृष्ण प्रणामी मंदिर, शिव भवानी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाएंगे। कार्यक्रम शाम से रात्रि तक चलेंगे।


शीतलदास की बगिया में होगा नौका विहार
शरद पूर्णिमा के मौके पर शीतलदास की बगिया में नौका विहार कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भगवान वटेश्वर और मां भवानी और राधा कृष्ण को फूलों से सजी नाव में नौका विहार कराया जाएगा। बड़वाले महादेव मंदिर समिति की ओर से भी भगवान वटेश्वर और मां भवानी को नौका विहार कराया जाएगा। मंदिर समिति के संजय अग्रवाल और प्रमोद नेमा ने बताया कि इस मौके पर संगीतमय भजन होंगे।
निकालेंगे चल समारोह
शरद पूर्णिमा महोत्सव पर हिन्दू उत्सव समिति की ओर से शरद पूर्णिमा पर परम्परागत चल समारोह निकाला जाएगा। समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष कैलाश बेगवानी ने बताया कि चल समारोह शाम को 6 बजे राधाकृष्ण मंदिर घोड़ा नक्कास से शुरू होगा, जो छोटे भैया कॉर्नर, जनकपुरी, भवानी चौक होते हुए रात्रि में शीतलदास की बगिया पहुंचेगा, यहां फूलों और रोशनी से सजी नौका में नौका विहार कराया जाएगा।

गर्भगृह के बाहर निकलेंगे बांके बिहारी
शहर के प्राचीन तलैया स्थित बांके बिहारी मार्र्कंडेय मंदिर में रात्रि में शरद उत्सव मनाया जाएगा। मंदिर के पं. रामनाारायण आचार्य ने बताया कि साल में एक बार शरद पूर्णिमा पर भगवान गर्भगृह से बाहर निकलते हैं। मंदिर प्रांगण में भगवान बांके बिहारी और प्रिया रानी को विराजमान किया जाएगा। श्रीजी मंदिर में शरद उत्सव लखेरापुरा स्थित श्रीजी मंदिर में मंगलवार को शरद उत्सव मनाया गया। इस मौके पर मंदिर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिर में भगवान को श्वेत रंग के वस्त्र पहनाए गए और हीरे के आभूषण कराए गए। इस मौके पर मंदिर में गरबा का आयोजन हुआ। मंदिर के श्रीकांत शर्मा ने बताया कि इस दौरान ठाकुरजी को चंद्रकला, फैनी, खोपरे की बफी, मठरी आदि का भोग लगाया गया। दर्शन का सिलसिला रात तक चलता रहा।

धार्मिक महत्व
मां चामुंडा दरबार के पं. रामजीवन दुबे ने बताया कि अश्विन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन वाल्मिकी जयंती और कोजागिरी व्रत भी होता है। इसी दिन से कार्तिक स्नान की शुरुआत होती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात में ही गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करने आती हैं. जो लोग इस दिन रात में मां लक्ष्मी का आव्हान करते हैं उन पर मां की विशेष कृपा रहती है।