
घर से निकलने पर जपें ये मंत्र, हर काम में मिलेगी सफलता
भोपाल। अपने अक्सर कई वाहनों पर कई प्रकार के मंत्र लिखे देखें होंगे। हम सामान्य जीवन में भी मंत्रों का पाठ करते ही हैं। मान्यता है कि मंत्र जहां एक ओर सिद्धि प्रदान करते हैं। वहीं ये हमारी रक्षा भी करते हैं।
इस संबंध में पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि वैसे तो रामरक्षास्त्रोत ही अपने आप में पूर्ण रक्षा कवच है। लेकिन इसमें कई श्लोक हैं। पंडित शर्मा के अनुसार भगवान श्रीराम के कई ऐसे मंत्र हैं जिन्हें श्रद्धा से पढ़ने पर मन चाही बात पूरी होती है। वहीं श्रीराम का ही एक मंत्र ऐसा भी है जो यात्रा में कवच का काम करता है।
उनके अनुसार आपने कई वाहनों पर भगवान राम का एक मंत्र लिखा देखा होगा। माना जाता है कि यह मंत्र वाहन से यात्रा करते समय आपकी सुरक्षा की गारंटी देता है।
अत: जब भी घर से बाहर जाएं, तो इस मंत्र का जप जरूर करें, माना जाता है कि इसके जाप से आप सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचेंगे।
मंत्र-
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।
हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
मंत्र का अर्थ- अयोध्यापुरी के राजा श्री रघुनाथजी को हृदय में रखकर नगर में प्रवेश करके सब काम कीजिए। उसके लिए विष अमृत हो जाता है, शत्रु मित्रता करने लगते हैं, समुद्र गाय के खुर के बराबर हो जाता है, अग्नि में शीतलता आ जाती है। भगवान राम का ये मंत्र किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है।
सफलता के लिए खास मंत्र...
इतना ही नहीं जब आप किसी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते हैं तो आपके मन में कई बार यह शंका अवश्य रहती हैं कि अमुक कार्य में सफलता मिलेगी या नहीं। कार्य में सफलता मिलने में कहीं कोई बाधा तो नहीं होगी।
इसके शंका के निवारण के लिए और कार्य में सफलता पाने के भी श्रीराम का एक मंत्र है, माना जाता है कि इसका जप करने से सभी प्रकार की बाधाओं का नाश हो जाता है और कार्य में सफलता अवश्य मिलती है।
मंत्र-
राम लक्ष्मणौ सीता च सुग्रीवों हनुमान कपि।
पञ्चैतान स्मरतौ नित्यं महाबाधा प्रमुच्यते।।
पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि जब भी आप घर से किसी विशेष कार्य के लिए बाहर निकलें तो सबसे पहले भगवान श्रीराम के चित्र के समक्ष इस मंत्र का जप मन ही मन में करें। उसके बाद घर से निकलें तो आपके कार्य में कोई बाधा नहीं आएगी और कार्य में सफलता भी मिलेगी।
सफलता के लिए ये चौपाई भी...
पंडित शर्मा के अनुसार इसके अलावा कई दफा लोग किसी कार्य को पूरी मेहनत तथा लगन के साथ करते हैं किन्तु वो कार्य बनते-बनते बिगड़ जाती है।
यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होता है तो केवल एक चौपाई के जाप से आपका कार्य बन सकता हैं, ये चौपाई सुंदरकाण्ड में मौजूद है...
चौपाई...
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
भावार्थ - किसी भी कार्य को करने से पूर्व प्रभु श्रीराम जी का स्मरण करने से सफलता प्राप्त होगी. जो भी ऐसा करता है उसके लिए विष भी अमृत बन जाता है, शत्रु मित्र बन जाते हैं, समुद्र गाय के खुर के जैसा हो जाता है, अग्नि में शीतलता उत्पन्न हो जाती है.
ये है मान्यता?
- ऐसी मान्यता है कि जब हनुमानजी लंका में माता सीता का पता लगाने केलिए गए थे, तब इनके मन में इस कार्य के सफल होने को लेकर शंका पैदा हुई थी। तो उन्होने श्रीराम जी का ध्यान करके लंका में प्रवेश किया, तथा अपने कार्य में सफल हुए।
- अतः यह माना जाता है कि किसी भी कार्य को करने से पूर्व अथवा इंटरव्यू आदि से पूर्व इस चौपाई को बोलने तथा श्रीराम का स्मरण करने से हर कार्य बन जाते हैं।
- रामचरितमानस की रचना तुलसीदास के द्वारा महार्षि वाल्मिकी की रामायण को आधार बनाकर की गई है। सुंदरकांड रामचरितमानस का ही पांचवा सोपान है। इसमें हनुमान जी के गुणों तथा यश के संबंध में बताया गया है।
रामरक्षा स्त्रोतम:
वहीं रामरक्षा स्त्रोतम कई मंत्रों का संग्रह है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि यह अपने आप में पूर्ण कवच है, जो मनुष्य की हमेशा ओर हर जगह रक्षा करने के साथ ही उसकी मदद भी करता है। ये भी मान्यता है कि जिन्हें ये कंठस्थ याद होता है और ये हर रोज इसका नियम से श्रद्धापूर्वक पाठ करते हैं। उन्हें या तो जीवन में कोई कठिनाई आती ही नहीं है, यदि आती भी है तो वह इससे बड़ी आसानी से उबर जाते हैं।
Published on:
03 Oct 2018 02:17 pm
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