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मध्यप्रदेश शहरों से नहीं हटा पा रहा स्लम एरिया, होगा 150 करोड़ का नुकसान

नगरीय प्रशासन विभाग को 12 सौ करोड़ तक मिलने की उम्मीद, केंद्र सरकार की स्पेशल कैपिटल असिस्टेंट योजना में अनुदान के लिए राज्य सरकार ने अपना दावा पेश किया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने योजना में दो हजार करोड़ का राशि पाने के लिए आवेदन किया है।

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भोपाल। अब सरकार को इस राशि को पाने के लिए राज्य में कई आर्थिक सुधार भी करने होंगे। हालांकि, स्लम एरिया नहीं हटने के चलते राज्य को 150 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ेगा। योजना में 1 अप्रेल के बाद हुए सुधारों पर ही केंद्र सरकार राशि जारी करेगी। राज्य को ये सुधार जनवरी-2024 तक करने होंगे। उन्हीं के आधार पर दावा पेश किया जा सकेगा।

टीडीआर-टीओडी को लेकर भी पॉलिसी नहीं
योजना के तहत प्रापर्टी, जल संरचना, रिवर फ्रंट, टीडीआर, टीओडी के साथ प्रॉपर्टी टैक्स में वृद्धि करने जैसे सुधार करने होंगे। साथ ही नगरीय निकायों में प्लानर्स की भर्ती प्रायोर्टी कॉरिडोर जैसे काम भी करने होंगे। ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट (टीडीआर) और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट(टीओडी) को लेकर अभी पॉलिसी ही नहीं बन पाई है। हालांकि, प्रॉपर्टी टैक्स में निकायों ने काफी अच्छा काम किया है। प्रदेश में औसत 12 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। मिलियन प्लस सिटी यानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में तो 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो रही है।

ऑनलाइन सेवाओं से 400 करोड़ मिलने की उम्मीद

यूजर चार्ज संसोधन, जीआइएस सर्वे, नगरपालिका बांड और सेवाओं को ऑनलाइन करने जैसे कामों के लिए 500 करोड़ मिलेंगे। इंदौर के बाद भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर भी नगरपालिका बांड जारी करने की तैयारी में है, तो प्रदेश में ई-नगर पालिका-2 सॉफ्टवेयर के जरिए नागरिक सेवाओं को बेहतर किया जा रहा है। विभाग को इस मद में 500 में से 400 करोड़ मिलने की उम्मीद है। अर्बन प्लानिंग को लेकर बदलाव पर निकायों को बड़े स्तर पर काम करना होगा। निकायों में भर्ती ना होना पाना भी एक बड़ी समस्या है। नगरीय प्रशासन विभाग प्रदेश में 8 जल संरचना और 4 रिवर फ्रंट विकसित करेगा। विभाग को इस वर्ष केंद्र से 12 सौ से 1500 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है।