
विशेष बच्चों की मदद करते हैं सामान्य बच्चे, प्रकृति के बीच चल रहा अनोखा इनक्लूजन स्कूल
भोपाल। ‘ मैं अपने बेटे के लिए क्या नहीं कर जाना चाहती हूं, लेकिन कई बार, अपने आप को इससे ज्यादा असहाय पाती हूं. ’ सेरेब्रल पॉल्सी पीडि़त छह साल के बच्चे की मां की बातों ने मुझे हिलाकर रख दिया। लेकिन उसने दर्द के साथ मुझे दिशा भी दे दी। मैं जो जब तक समाजसेवा के कामों में लगी थी, अब तय कर चुकी थी मुझे क्या करना है?
11 साल पहले का वाक्या बताते हुए विवा जोशी भावुक हो जाती हैं। विवा अब, रातीबड़ इलाके में आईईएस स्कूल के पास बेलखेड़ी गांव में प्रकृति के बीच विशेष बच्चों के साथ सामान्य बच्चों को औपचारिक शिक्षा देने वाला आयाम इनक्लूजन स्कूल चलाती हैं जो शहर और प्रदेश में अपनी तरह का अनूठा स्कूल है।
विशेष बच्चों को आसानी से एडमिशन नहीं देते स्कूल
ऑटिज्म, सेरेब्रल पॉल्सी सहित मेंटल डिसएबेलिटी से लेकर लर्निंग डिसएबेलिटी से ग्रसित बच्चों का विकास सामान्य बच्चों के साथ बेहतर होता है, यह सलाह डॉक्टर देते हैं, लेकिन ऐसे बच्चों का सामान्य स्कूलों में एडमिशन कितना कठिन है, यह उनके माता-पिता जानते है।
विवा बताती हैं कि, सरकारी नियमों के अनुसार ऐसे बच्चों को एडमिशन देने से मना नहीं किया जा सकता, लेकिन स्कूल में उनके लिए हर समय शेडो टीचर की जरूरत होती है, इसके बावजूद स्कूल बच्चो के अभिभावकों की ओर से आपत्ति आने की बातक कहकर ऐसे बच्चों से किनारा कर लेते हैं।
ऐसे में मैने भरत नगर में जब पहला इनक्लूजन (सहशिक्षा) वाला स्कूल खोला। उद्देश्य स्पष्ट था सामान्य बच्चों के स्कूल में विशेष बच्चों को एडमिशन नहीं मिलता तो विशेष बच्चों के स्कूल में तो सामान्य बच्चों को लाया जा सकता है।
बस्ती के बच्चों को भी निशुल्क शिक्षा
विशेष बच्चों को ट्रेनिंग के साथ आठवीं तक की औपचारिक शिक्षा देने वाला आयाम स्कूल जब शुरू हुआ तो सबसे बड़ी चुनौती सामान्य बच्चों को विशेष बच्चों के साथ पढऩे के लिए तैयार करना था। इसका हल मिला शिक्षा से वंचित बच्चों के रूप में।
विवा की टीम ने बस्तियों में सर्वे कर स्कूल नहीं पहुंचने से लेकर बीच में छोड़ देने वाले बच्चों को ढूंढा उन्हें निशुल्क शिक्षा के लिए अपने स्कूल में जोड़ा और यह आईडिया काम कर गया। विभा बताती हैं कि इस स्कूल में डिसएबेलिटी और एज का बार नहीं है, सभी को एडमिशन मिलता है, इसके चलते 300 से अधिक बच्चें अब तक यहां शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में 45 से अधिक बच्चे संस्था में पढ़ाई करने के साथ डे केयर में रह रहे हैं।
प्रकृति के बीच मिलेगी नशे से मुक्ति
आयाम से जुड़े मनोचिकित्सक डॉ. प्रीतेश गौतम न केवल बच्चों के लिए काम कर रहे हैं बल्कि नशे में बुरी तरह जकड़े लोगों के लिए भी अभियान चला रहे हैं। प्रीतेश बताते हैं हर सप्ताह में मेरे पास 80 से ज्यादा ऐसे मरीज आते हैं जो नशे का शिकार हैं, लेकिन सिर्फ काउंसलिंग और दवा ही काफी नहीं है वहीं बंद कमरों में कैद करके भी इनका सही इलाज संभव नहीं है, ऐसे में इसी संस्था के साथ प्रकृति के बीच इस बुराई से लडऩे का केन्द्र शुरू किया जा रहा है जिसके लिए जगह-जगह शिविर लगाकर पीडि़तों को जागरूक किया जाएगा जिससे वे नशे की लत से लड़ सकें।
Published on:
24 Jul 2019 07:14 am
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