
भोपाल. दुनिया में कोरोना की दस्तक के साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह से चरमरा गई है। देश की जीवन रेखा कही जाने वाली रेलवे भी इससे अछूती नहीं रही है। अगर बात पिछले चार महीने में रेलवे की आय करें तो तो यह लगभग शून्य ही हो गई थी। रेलवे के राजस्व के श्रोत बंद हो गये हैं और खर्चे पहले की तरह ही हो रहे हैं। बात मध्य प्रदेश के भोपाल की करें तो हर दिन दो करोड़ रुपए से ज्यादा राजस्व देने वाले रेलवे सोर्स ठप पड़ गए हैं। प्लेटफार्म टिकट और टिकट चैकिंग और अन्य आय से शून्य हो गई है।
इस मंदी से उबरने के लिये रेलवे के अफसरों ने यात्री ट्रेनों का घाटा मालगाड़ियों से कवर करने की रणनीति बनाई है। जिससे अगस्त माह में ही कमाई दोगुनी रफ्तार से बढ़ेगी। कुछ ही दिनों के अंदर भोपाल, मंडीदीप स्टेशन से बांग्लादेश के लिए स्पेशल मालगाड़ी चलाई जाएगी। इसकी सहमति रेलवे बोर्ड और गृह मंत्रालय से प्राप्त हो गई है।
रेलवे अफसरों की माने तो मंडल में जुलाई 2019 में 485 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस साल जुलाई तक 238 करोड़ रुपए खजाने में आए हैं। अधिकारियों का कहना है, हालांकि बिजनेस मैनेजमेंट ग्रुप के गठन के बाद अगस्त में घाटा रिकवर होना शुरू हो जाएगा। इसके अलाबा कोचिंग और सेंड्री से आय न के बराबर हुई है। भोपाल डीआरएम उदय बोरणवकर ने बताया कि कोरोना काल में रेलवे में बदलावआए हैं कोरोना काल में रेलवे ने आत्मनिर्भर बनना सीखा है। संक्रमण के बचाव के लिए आटोमैटिक वाशिंग मशीन, यूवी रेज स्कैनर और सैनिटाइजर जैसे कई अविष्कार किए हैं।
डिवीजन में संक्रमण और बचाव
भोपाल डीआरएम उदय बोरणवकर ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए हर रेलकर्मी ने जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने पूरी सुरक्षा के साथ रेल का परिचालन किया है। डिवीजन में 71 कर्मचारी संक्रमित हुए और स्वस्थ्य हुआ लेकिन दुखद है कि एक कर्मचारी की मौत भी हुई है। हालांकि निजी ट्रेन चलाने के सवाल पर डीआरएम ने कही कि भोपाल से मुबंई, पुणे सहित अन्य ट्रेनों को चलाने का मामला रेलवे बोर्ड की पालिसी के अंतर्गत आता है। इस संबंध में जानकारी बोर्ड से मिलेगी। ट्रेनों के संबंध में निर्णय बोर्ड और हेडक्वार्टर की ओर से हम प्राप्त होता है।
Published on:
31 Aug 2020 12:34 pm
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